त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को BSF जवानों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हो गई। आशाबाड़ी इलाके में हुई इस घटना में तीन BSF जवानों के घायल होने की खबर है। मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने घटना की निंदा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ तेजी से और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
यह घटना बॉक्सानगर इलाके के आशाबाड़ी गांव में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विवाद एक स्थानीय युवक को BSF कर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद शुरू हुआ था। युवक पर तस्करी से जुड़े होने का संदेह जताया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने BSF के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया।
युवक को हिरासत में लेने के बाद बढ़ा विवाद
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, BSF की 49वीं बटालियन के जवानों ने सीमा के पास एक स्थानीय युवक हेजफुर रहमान को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि हिरासत के दौरान युवक के साथ मारपीट की गई, जिससे उसके पैर में चोट आई।
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने आशाबाड़ी-रहीमपुर सड़क पर जाम लगा दिया। वे युवक के साथ कथित मारपीट को लेकर जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
इसी दौरान BSF की 49वीं बटालियन का एक वाहन वहां पहुंचा। वाहन में मौजूद जवानों और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ ने जवानों पर लाठी और बांस के डंडों से हमला किया। BSF के वाहन में भी तोड़फोड़ की गई।
आठ लोगों की गिरफ्तारी, FIR में कई आरोपी
घटना के बाद कलामचौरा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात किए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और सोमवार रात आठ लोगों को गिरफ्तार किया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, BSF की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। कुछ रिपोर्टों में FIR में 18 और कुछ में 19 लोगों को आरोपी बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इस संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर है।
पुलिस की जांच का मुख्य फोकस घटना में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना और पूरे विवाद के घटनाक्रम का पता लगाना है। गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने आशाबाड़ी में BSF जवानों पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि सुरक्षा बलों के जवानों के साथ इस तरह की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ तेजी से और सख्त कार्रवाई करने तथा उन्हें कानून के दायरे में लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के सम्मान और सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की जानकारी दी। आठ लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि भी मुख्यमंत्री के सार्वजनिक बयान के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में की गई है।
पहले भी सामने आ चुकी हैं BSF और स्थानीय लोगों के बीच झड़पें
त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले में BSF और स्थानीय लोगों के बीच टकराव की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। नवंबर 2025 में बिशालगढ़ इलाके में पशु तस्करी रोकने के दौरान BSF जवानों पर हमले की खबर आई थी। इस घटना में दो जवान घायल हुए थे और पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था।
मार्च 2025 में भी सेपाहिजाला जिले के पुटिया इलाके में तस्करी रोकने के दौरान BSF और संदिग्ध तस्करों के बीच संघर्ष हुआ था। इस घटना में एक जवान घायल हुआ था।
आशाबाड़ी की ताजा घटना ने एक बार फिर सीमावर्ती इलाकों में BSF की ड्यूटी, स्थानीय लोगों के साथ विवाद और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।
फिलहाल आशाबाड़ी में स्थिति नियंत्रण में होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की जांच जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई और दोनों पक्षों की शिकायतों से जुड़े तथ्यों पर नजर रहेगी।
संपादकीय तथ्य-जांच नोट: घायल जवानों की संख्या को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। NDTV और अन्य रिपोर्टों में तीन BSF जवानों के घायल होने की जानकारी है, जबकि India Today NE ने असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार BSF कर्मियों के घायल होने की खबर दी है। इसलिए प्रकाशन से पहले पुलिस या BSF से इसकी पुष्टि करना उचित होगा।
इसी तरह, पिछले ढाई साल में ठीक तीन ऐसी घटनाएं होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए लेख में इसे निश्चित आंकड़े के रूप में शामिल नहीं किया गया है।