17 साल की भारतीय तीरंदाज कुमकुम अनिल मोहोद ने एशियन गेम्स 2026 में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपने अभियान का समापन किया। अमरावती की रहने वाली कुमकुम ने पहले अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में भारत को स्वर्ण दिलाया। इसके बाद 3 अक्टूबर को उन्होंने दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को शूट-ऑफ में हराकर महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा का स्वर्ण भी अपने नाम किया। व्यक्तिगत स्पर्धा का यह स्वर्ण एशियन गेम्स में इस वर्ग में भारत का पहला था।
कुमकुम की यह उपलब्धि इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके तीरंदाजी करियर की शुरुआत महंगे उपकरणों से नहीं हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 2018 में उनकी दादी कुसुम ने करीब 3,000 रुपये देकर उनका पहला लकड़ी का धनुष खरीदा था। इसके कुछ ही महीनों बाद कुमकुम ने सब-जूनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था।
दादी के पैसों से खरीदा पहला धनुष
कुमकुम ने 2018 में तीरंदाजी शुरू की थी। उनके परिवार के लिए महंगे खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं के खर्च उठाना आसान नहीं था। टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती दौर में दादी ने 3,000 रुपये देकर लकड़ी का धनुष दिलाया। बाद में कुमकुम के पिता अनिल मनोहर मोहोद ने उनके लिए सेकेंड-हैंड रिकर्व धनुष की व्यवस्था की।
कुमकुम के पिता अमरावती में मिठाई की दुकानों के लिए गत्ते के डिब्बे बनाने का काम करते हैं। परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बीच बेटी की ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च जुटाना उनके लिए आसान नहीं था।
जब पिता बाइक से ले जाते थे अकादमी
कुमकुम के प्रशिक्षण के शुरुआती वर्षों में आने-जाने का खर्च भी परिवार के लिए चुनौती था। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कुमकुम के खेल को खेलो इंडिया योजना के तहत समर्थन मिलने के बाद साझा ऑटो की व्यवस्था महंगी पड़ने लगी। दूसरे बच्चों के साथ यह व्यवस्था बंद होने के बाद उनके पिता उन्हें मोटरसाइकिल से प्रशिक्षण के लिए ले जाने लगे।
कुमकुम अमरावती के खेलो इंडिया केंद्र में प्रशिक्षण लेती हैं। उनके कोच प्रफुल्ल डांगे हैं। 10 मार्च 2009 को जन्मी कुमकुम ने 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था। विश्व तीरंदाजी के खिलाड़ी प्रोफाइल में भी उनका नाम Kumkum Anil Mohod और जन्मतिथि 10 मार्च 2009 दर्ज है।
सेकेंड-हैंड धनुष से विश्व कप में भी जीता था गोल्ड
एशियन गेम्स से पहले ही कुमकुम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। मई 2026 में शंघाई में हुए विश्व तीरंदाजी कप के दूसरे चरण में वह भारतीय महिला रिकर्व टीम का हिस्सा थीं, जिसने स्वर्ण पदक जीता। विश्व तीरंदाजी के आधिकारिक रिकॉर्ड में कुमकुम के नाम 2026 के दो विश्व कप टीम स्वर्ण पदक दर्ज हैं।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शंघाई विश्व कप में कुमकुम जिस धनुष का इस्तेमाल कर रही थीं, वह सेकेंड-हैंड था और वह कई वर्षों से उसी उपकरण के साथ अभ्यास कर रही थीं।
एशियन गेम्स में पहले टीम गोल्ड, फिर व्यक्तिगत गोल्ड
2 अक्टूबर को कुमकुम ने अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा के साथ महिला रिकर्व टीम फाइनल में दक्षिण कोरिया के खिलाफ मुकाबला किया। भारतीय टीम ने दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर इस स्पर्धा में एशियन गेम्स का अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। कुमकुम ने फाइनल के निर्णायक क्षणों में महत्वपूर्ण 10 अंक हासिल किए।
उसी दिन कुमकुम ने धीरज बोम्मदेवरा के साथ मिश्रित रिकर्व टीम स्पर्धा में रजत पदक भी जीता। भारतीय जोड़ी को फाइनल में चीन के खिलाफ 3-5 से हार मिली। इस तरह व्यक्तिगत मुकाबले से पहले ही कुमकुम के खाते में एक स्वर्ण और एक रजत आ चुका था।
3 अक्टूबर को महिला व्यक्तिगत रिकर्व के फाइनल में उनका सामना दक्षिण कोरिया की ओह येजिन से हुआ। मुकाबला 5-5 की बराबरी पर पहुंचा, जिसके बाद शूट-ऑफ हुआ। निर्णायक तीर में कुमकुम ने 10 अंक हासिल किए, जबकि ओह येजिन 8 अंक पर रहीं। कुमकुम ने 6-5 से मुकाबला जीतकर व्यक्तिगत स्वर्ण अपने नाम किया।
इस जीत के साथ वह एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला तीरंदाज बनीं। उनकी जीत ने भारत के लिए 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का एक कोटा स्थान भी सुनिश्चित किया; यह कोटा भारतीय दल के नाम है, व्यक्तिगत रूप से कुमकुम के नाम नहीं।
कुमकुम मोहोद के एशियन गेम्स 2026 पदक
- महिला रिकर्व टीम: स्वर्ण पदक
- मिश्रित रिकर्व टीम: रजत पदक
- महिला व्यक्तिगत रिकर्व: स्वर्ण पदक
इस तरह 17 वर्षीय कुमकुम ने एशियन गेम्स अभियान का अंत दो स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ किया। अमरावती से शुरू हुई उनकी तीरंदाजी यात्रा में दादी का शुरुआती आर्थिक सहयोग, पिता की रोजमर्रा की मदद और लंबे समय तक सीमित संसाधनों में किया गया अभ्यास उनकी शुरुआती कहानी का हिस्सा रहा है।
सत्यापन टिप्पणी: महिला रिकर्व टीम फाइनल के स्कोर को लेकर कुछ शुरुआती प्रकाशित रिपोर्टों में 5-2 और 5-3 का अंतर दिखा। बाद की/अधिक व्यापक रिपोर्टिंग में 5-3 स्कोर लगातार दर्ज है, इसलिए लेख में 5-3 को इस्तेमाल किया गया है।