बिहार में गंडक नदी के बढ़े जलस्तर और तटबंध टूटने के बाद बाढ़ का असर बढ़ गया है। 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक, सारण समेत छह जिलों के करीब 255 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 4 लाख लोगों के प्रभावित होने और लगभग 44 हजार लोगों के सुरक्षित स्थानों पर जाने की जानकारी सामने आई है। उत्तर प्रदेश में भी बारिश थमने के बावजूद गंगा, शारदा समेत करीब 15 नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी बनी हुई है।
हालांकि, बिहार के कुल क्षेत्रफल का करीब 73 प्रतिशत हिस्सा बाढ़-प्रवण है। इसे मौजूदा बाढ़ से सीधे प्रभावित 73 प्रतिशत क्षेत्र नहीं माना जाना चाहिए। बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के अनुसार राज्य का 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़-प्रवण है।
गंडक के उफान से बिहार के कई जिलों में असर
गंडक नदी में पानी बढ़ने और कुछ स्थानों पर तटबंध टूटने से सबसे ज्यादा असर सारण जिले में बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार अकेले सारण में करीब 170 गांव प्रभावित हैं। गोपालगंज के शीतलपुर में रिंग तटबंध टूटने की भी जानकारी सामने आई है।
गंडक के बढ़े जलस्तर का असर पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण के अलावा दूसरे निचले इलाकों में भी देखा जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क और सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई है।
कटिहार में भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक वहां कोसी नदी खतरे के निशान से 45 सेंटीमीटर और गंगा 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ के तेज बहाव में तीन युवकों की मौत की भी जानकारी दी गई है। इस घटना और आंकड़े की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिली है, इसलिए इसे अंतिम आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
बिहार में गंगा और दूसरी नदियां भी उफान पर
केंद्रीय जल आयोग ने बिहार में गंभीर बाढ़ की स्थिति को लेकर ऑरेंज बुलेटिन जारी किया है। 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार 28 स्थानों पर गंभीर बाढ़ की स्थिति दर्ज की गई। गंडक और गंगा कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
गंगा पटना के दानापुर और गांधी घाट समेत कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज की गई। गांधी घाट पर जलस्तर 49.69 मीटर बताया गया, जो खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर था।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, गंगा, कोसी, बागमती और घाघरा कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर हैं। नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के बाद नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।
राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक सारण में 12 एनडीआरएफ और सात एसडीआरएफ दल तैनात किए गए हैं। इन टीमों के साथ नावों की भी व्यवस्था की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए 3,000 से अधिक राशन पैकेट प्रभावित इलाकों में पहुंचाए जा चुके थे, जबकि अतिरिक्त राशन पैकेट गिराए जाने की तैयारी थी। प्रशासन राहत वितरण, बचाव अभियान और जरूरी सेवाओं की उपलब्धता पर नजर रख रहा है।
यूपी में 15 नदियों के जलस्तर पर नजर
उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर पड़ा है, लेकिन नदियों में बढ़ा पानी अभी भी चिंता का कारण बना हुआ है। 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा, शारदा समेत करीब 15 नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। मौसम विभाग ने उस दिन प्रदेश के किसी जिले के लिए बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया था।
गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से करीब 26 सेंटीमीटर ऊपर बताई गई है। उन्नाव में सई नदी का पानी कई गांवों तक पहुंचने की जानकारी है। लखनऊ के निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
बाराबंकी में सरयू के बढ़े जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का असर बना हुआ है, जबकि कुशीनगर में गंडक नदी के कारण कटान और जलभराव की समस्या सामने आई है।
यूपी के कुशीनगर में राहत अभियान
कुशीनगर में गंडक नदी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज किया था। राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार 29 सितंबर की सुबह नदी का जलस्तर 96.48 मीटर दर्ज किया गया था, जो 96 मीटर के खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर था।
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और बाढ़ चौकियां स्थापित की थीं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, राज्य आपदा मोचन बल, पीएसी की बाढ़ इकाइयों और स्थानीय गोताखोरों को भी अभियान में लगाया गया था।
73 प्रतिशत वाला आंकड़ा क्या बताता है?
बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति के बीच 73 प्रतिशत का आंकड़ा अक्सर सामने आ रहा है। यह आंकड़ा राज्य के बाढ़-प्रवण क्षेत्र से संबंधित है, न कि अक्टूबर 2026 में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का।
बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक राज्य के कुल 94.16 लाख हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र में से 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बाढ़-प्रवण है। यानी करीब 73 प्रतिशत क्षेत्र बाढ़ के जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित है। विभाग के अनुसार 38 में से 28 जिले बाढ़-प्रवण हैं।
फिलहाल 3 अक्टूबर को सामने आई स्थिति में तत्काल चिंता गंडक, गंगा और दूसरी नदियों के बढ़े जलस्तर, तटबंधों पर दबाव और निचले इलाकों में पानी फैलने को लेकर है।
संपादकीय सत्यापन नोट: 255 गांव और करीब 4 लाख प्रभावित लोगों का आंकड़ा 3 अक्टूबर की उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में मिला, लेकिन इस उत्तर में उस आंकड़े की अलग से बिहार सरकार की उसी तारीख की जिला-वार आधिकारिक सूची से पुष्टि नहीं हो सकी। इसलिए इसे रिपोर्टेड आंकड़े के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वहीं 73 प्रतिशत का आंकड़ा वर्तमान बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र नहीं, बल्कि बिहार के दीर्घकालिक बाढ़-प्रवण क्षेत्र का आधिकारिक आंकड़ा है।