भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपने ताजा अनुमान में बड़ा सुधार किया है। 13 अक्टूबर 2026 को जारी अक्टूबर वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के मुताबिक भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 2026 और 2027, दोनों वर्षों में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जुलाई के अनुमान की तुलना में 2026 के लिए यह 0.6 प्रतिशत अंक और 2027 के लिए 0.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी है। इसके साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
इसके उलट IMF ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि का अनुमान 2026 के लिए 3.1 प्रतिशत रखा है। जुलाई में यह अनुमान 3 प्रतिशत था। 2027 के लिए वैश्विक वृद्धि का अनुमान 3.4 प्रतिशत है। यानी भारत की अनुमानित वृद्धि वैश्विक औसत से काफी ऊपर बनी हुई है।
भारत की ग्रोथ के पीछे क्या वजह है?
IMF के मुताबिक भारत की मजबूत वृद्धि में घरेलू मांग, सेवाओं की गतिविधियों और AI से जुड़े निवेश की अहम भूमिका है। भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था उसे वैश्विक मांग में कमजोरी के बीच कुछ हद तक सहारा देती है।
IMF ने सितंबर में भी भारत की आर्थिक क्षमता पर सकारात्मक टिप्पणी की थी। भारत में मजबूत आर्थिक बुनियाद और नीतिगत ढांचे के साथ निजी क्षेत्र की सक्रियता, तकनीकी क्षमता और विनिर्माण से जुड़ी संभावनाओं को विकास के महत्वपूर्ण आधारों में गिना गया था। IMF ने उत्पादकता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा मजबूत करने और सुधारों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया था।
भारत की अर्थव्यवस्था में सेवाओं का बड़ा योगदान है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक, वित्तीय सेवाओं और अन्य आधुनिक क्षेत्रों में गतिविधियों ने भी आर्थिक गतिविधि को सहारा दिया है। IMF के ताजा आकलन में AI निवेश को सिर्फ विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं, बल्कि भारत और चीन जैसे एशियाई देशों के लिए भी वैश्विक व्यापार और वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारक बताया गया है।
AI निवेश से भारत को कैसे फायदा?
IMF के मुख्य अर्थशास्त्री सिल्वाना टेनरेरो ने बताया कि AI की मांग ने चीन, भारत और दूसरे एशियाई देशों की वृद्धि को बढ़ावा दिया है। IMF के अनुसार 2023 से 2025 के बीच वैश्विक व्यापार 8.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि AI से जुड़े व्यापार में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई। IMF के आकलन के मुताबिक AI से संबंधित व्यापार को अलग कर दिया जाए तो इस अवधि में कुल वैश्विक व्यापार वृद्धि केवल 4.6 प्रतिशत रहती।
इसका मतलब यह है कि AI से जुड़े हार्डवेयर, तकनीकी सेवाओं और सप्लाई चेन में बढ़ती मांग का फायदा एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को मिल रहा है। हालांकि IMF ने यह भी चेतावनी दी है कि AI निवेश से जुड़े अनुमान में जोखिम मौजूद हैं। यदि AI से अपेक्षित उत्पादकता लाभ नहीं मिला या निवेश में अचानक कमी आई, तो वैश्विक वृद्धि और वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दबाव क्यों?
IMF ने वैश्विक वृद्धि के बावजूद कई जोखिमों को रेखांकित किया है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों पर दबाव है। IMF का अनुमान है कि 2026 में औसत तेल कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल और 2027 में 87 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्च 2027 में फिर से खुलेगा और इसके बाद वैश्विक शिपिंग परिस्थितियां धीरे-धीरे सामान्य होंगी।
IMF ने यह भी कहा है कि लंबे समय तक युद्ध, बढ़ती महंगाई, ऊंची सरकारी उधारी लागत, चरम मौसम और AI निवेश में संभावित गिरावट वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं। अगर तेल की कीमतें प्रतिकूल स्थिति में 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो IMF के अनुमान के मुताबिक वैश्विक वृद्धि पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति
IMF के अक्टूबर अनुमान में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि 2026 और 2027 दोनों के लिए 2.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चीन की वृद्धि 2026 में 4.5 प्रतिशत और 2027 में 4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। यूरो क्षेत्र के लिए 2026 की वृद्धि का अनुमान 1.1 प्रतिशत किया गया है।
इसके मुकाबले भारत की 7 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि उसे प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से आगे रखती है। हालांकि IMF ने साफ किया है कि यह अनुमान जोखिमों से मुक्त नहीं है। ऊंची तेल कीमतें, महंगाई, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव भारत की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान बताता है कि IMF को भारत में घरेलू आर्थिक गतिविधियों और सेवाओं की मजबूती पर भरोसा है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर AI निवेश से पैदा हुई मांग का एक हिस्सा भारत जैसे एशियाई देशों तक पहुंच रहा है।
लेकिन आगे की राह में महंगाई और ऊर्जा कीमतें महत्वपूर्ण रहेंगी। IMF ने वैश्विक स्तर पर भी वित्तीय गुंजाइश मजबूत करने और सरकारी कर्ज को टिकाऊ स्तर पर लाने की जरूरत बताई है। भारत के मामले में भी लंबे समय तक ऊंची वृद्धि बनाए रखने के लिए निवेश, उत्पादकता, कौशल और सुधारों की गति महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल IMF का अक्टूबर 2026 अनुमान भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जुलाई के मुकाबले बेहतर तस्वीर पेश करता है। हालांकि यह पूर्वानुमान है, वास्तविक वृद्धि का अंतिम आंकड़ा नहीं। वैश्विक ऊर्जा कीमतों, युद्ध की स्थिति, महंगाई और AI निवेश में बदलाव के साथ भविष्य के अनुमानों में फिर संशोधन हो सकता है।