मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। 3 मार्च 2025 को हुई हत्या से फैसले तक कुल 590 दिन बीते। इस दौरान मामले में 126 तारीखें पड़ीं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों की गवाही हुई। 30 सितंबर 2026 को अदालत दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहरा चुकी थी।
3 मार्च 2025: सौरभ की हत्या
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 की रात मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सौरभ राजपूत की हत्या की गई। जांच में पुलिस ने आरोप लगाया था कि सौरभ को पहले नशीली या नींद लाने वाली दवा दी गई और इसके बाद साहिल शुक्ला को घर बुलाया गया। हत्या के बाद शव को नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपाने की बात सामने आई।
मामले की शुरुआती पुलिस जांच में हत्या के पीछे मुस्कान और साहिल के संबंध को वजह बताया गया था। हालांकि, यह पुलिस की जांच और अभियोजन का पक्ष था, जिसे बाद में अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर परखा गया।
4 मार्च: हिमाचल जाने की बात सामने आई
पुलिस और अभियोजन की कहानी के अनुसार, हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए। उपलब्ध रिपोर्टों में उनके शिमला और मनाली जाने का भी उल्लेख है। बाद की जांच में उनके ठहरने से जुड़े रिकॉर्ड और होटल कर्मचारियों की गवाही को भी मामले के साक्ष्यों में शामिल किया गया।
18 मार्च 2025: मामला खुला, गिरफ्तारी हुई
करीब दो सप्ताह बाद 18 मार्च को मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने सौरभ के घर से नीले ड्रम में शव बरामद किया और मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया। 19 मार्च को दोनों को अदालत में पेश किया गया और इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
12 मई 2025: करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट
पुलिस ने हत्या के करीब 54 दिन बाद अदालत में लगभग 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। उस समय चार्जशीट में 34 गवाहों के बयान शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद में ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह अदालत में पेश किए।
यहां एक तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है: चार्जशीट में बताए गए गवाहों की संख्या और अदालत में वास्तव में पेश हुए गवाहों की संख्या अलग थी। अभियोजन ने चार्जशीट में 34 गवाह दर्ज किए थे, जबकि मुकदमे के दौरान 22 गवाहों की गवाही हुई।
जुलाई 2025: जिला अदालत में ट्रायल शुरू
जुलाई 2025 में मामला जिला जज की अदालत में ट्रायल के लिए आया। इसके बाद परिवार, पुलिस, डॉक्टर, ड्रम और चाकू से जुड़े गवाहों समेत कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। दिसंबर 2025 में नीला ड्रम और ट्रॉली बैग को अदालत में सबूत के तौर पर पेश किए जाने की जानकारी भी सामने आई।
2026 में सुनवाई आगे बढ़ी
अप्रैल 2026 में अदालत ने मुस्कान और साहिल से आरोपों के संबंध में सवाल किए। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों ने आरोपों से इनकार किया। इसके बाद मई से अंतिम बहस की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अभियोजन और बचाव पक्ष ने अदालत के सामने अपने-अपने तर्क रखे।
17 सितंबर 2026: अंतिम बहस पूरी
मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस 17 सितंबर 2026 को पूरी हुई। इसके बाद अदालत ने फैसले की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। मुकदमे के दौरान कुल 126 तारीखें लगीं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों की गवाही दर्ज हुई।
30 सितंबर 2026: मुस्कान और साहिल दोषी करार
30 सितंबर को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। उस दिन अदालत ने सजा की मात्रा पर फैसला बाद के लिए रखा और 14 अक्टूबर की तारीख तय की।
14 अक्टूबर 2026: दोनों को मृत्युदंड
14 अक्टूबर को अदालत ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कड़ी सजा की मांग की थी। बचाव पक्ष ने भी अदालत के सामने अपनी दलीलें रखीं। अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई|
फैसले के बाद सौरभ के परिवार ने अदालत के निर्णय पर संतोष जताया। वहीं, दोषियों के पास इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। इसलिए जिला अदालत का मृत्युदंड सुनाने का फैसला अंतिम रूप से फांसी दिए जाने के बराबर नहीं है; आगे की न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
हत्या से मृत्युदंड तक पूरी टाइमलाइन
- 3 मार्च 2025: अभियोजन के अनुसार सौरभ राजपूत की हत्या।
- 4 मार्च 2025: मुस्कान और साहिल के हिमाचल जाने की जानकारी सामने आई।
- 18 मार्च 2025: पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया और नीले ड्रम से शव बरामद किया।
- 12 मई 2025: करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल; इसमें 34 गवाहों के बयान दर्ज होने की जानकारी।
- जुलाई 2025: जिला अदालत में ट्रायल शुरू।
- 19 दिसंबर 2025: नीला ड्रम और ट्रॉली बैग अदालत में सबूत के तौर पर पेश किए गए।
- 21 अप्रैल 2026: अदालत ने दोनों से आरोपों को लेकर सवाल किए; दोनों ने आरोपों से इनकार किया।
- 17 सितंबर 2026: अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी।
- 30 सितंबर 2026: मुस्कान और साहिल दोषी करार।
- 14 अक्टूबर 2026: दोनों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
इस तरह 3 मार्च 2025 की घटना से 14 अक्टूबर 2026 के सजा संबंधी फैसले तक 590 दिन का अंतर रहा। मुकदमे में 126 तारीखें लगीं और 22 गवाहों की गवाही हुई। पुलिस की चार्जशीट से लेकर ट्रायल और दोषसिद्धि तक मामले की न्यायिक प्रक्रिया करीब 19 महीने चली।