बदलते मौसम के बीच अगर अचानक तेज बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द और कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य वायरल बुखार मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण डेंगू में भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच और उनकी सलाह जरूरी है। भारत सरकार के National Center for Vector Borne Diseases Control (NCVBDC) के अनुसार, डेंगू के संदिग्ध लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
डेंगू में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक डेंगू होने पर तेज बुखार के साथ सिरदर्द, शरीर में दर्द, मतली और त्वचा पर दाने जैसे लक्षण हो सकते हैं। आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द भी डेंगू की पहचान में देखे जाने वाले सामान्य लक्षणों में शामिल हैं।
NCVBDC की जानकारी के अनुसार डेंगू में अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, मतली-वोमिटिंग और शरीर पर दाने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि बुखार और शरीर दर्द कई दूसरी वायरल या संक्रामक बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए इन लक्षणों को देखकर खुद से डेंगू का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं। CDC के अनुसार, डेंगू की पुष्टि के लिए रक्त जांच का इस्तेमाल किया जाता है।
बुखार कम होने के बाद भी रहें सावधान
डेंगू में एक अहम बात यह है कि गंभीर स्थिति के चेतावनी संकेत कई बार बुखार कम होने के आसपास या उसके बाद दिखाई दे सकते हैं। WHO के मुताबिक गंभीर डेंगू के लक्षणों में तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, नाक या मसूड़ों से खून आना, खून की उल्टी या मल में खून, अत्यधिक कमजोरी और बेचैनी शामिल हो सकते हैं।
CDC के अनुसार गंभीर डेंगू की स्थिति कुछ घंटों में विकसित हो सकती है और यह मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। बुखार उतरने के बाद अगले 24 से 48 घंटे में चेतावनी संकेतों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
इन लक्षणों पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें:
- तेज या लगातार पेट दर्द
- बार-बार उल्टी
- नाक या मसूड़ों से खून आना
- उल्टी या मल में खून आना
- बहुत ज्यादा कमजोरी, सुस्ती या बेचैनी
- सांस लेने में परेशानी
- हाथ-पैर ठंडे पड़ना या पेशाब की मात्रा कम होना
भारत सरकार के स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों में भी पेट दर्द, लगातार उल्टी, म्यूकोसल ब्लीडिंग, सुस्ती या बेचैनी जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की सलाह दी गई है।
डेंगू का शक हो तो क्या करें?
डेंगू का कोई ऐसा विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है जो बीमारी को सीधे खत्म कर दे। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों और मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है। इसलिए बुखार या डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और आराम करना मददगार हो सकता है। बुखार या दर्द के लिए कौन-सी दवा लेनी है, यह चिकित्सकीय सलाह के आधार पर तय किया जाना चाहिए। CDC डेंगू की आशंका में एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचने की सलाह देता है, क्योंकि इनमें रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
मच्छरों से बचाव भी जरूरी
डेंगू संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलता है। बीमारी की आशंका होने पर मरीज को भी मच्छरों के काटने से बचाना जरूरी है, क्योंकि बीमारी के शुरुआती दिनों में वायरस रक्त में मौजूद हो सकता है और संक्रमित व्यक्ति को काटने वाला मच्छर आगे संक्रमण फैला सकता है।
घर में पानी जमा न होने देना, पानी की टंकियों और कंटेनरों को ढककर रखना तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना संक्रमण का जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।
मौसम बदलने के दौरान बुखार और शरीर दर्द को हर बार डेंगू नहीं माना जा सकता, लेकिन तेज बुखार के साथ डेंगू से जुड़े लक्षण मौजूद हों तो जांच में देरी भी नहीं करनी चाहिए। खासकर बुखार कम होने के बाद पेट दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव या अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेत दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
संपादकीय नोट: इस विषय पर कोई शहर-विशेष केस संख्या, स्थानीय प्रकोप, तारीख या अधिकारी का बयान उपलब्ध इनपुट में नहीं दिया गया था, इसलिए लेख में ऐसे अपुष्ट स्थानीय आंकड़े शामिल नहीं किए गए हैं।