दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) पर यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचाने के लिए ड्राइवरलेस ट्रेन चलाने की योजना आगे बढ़ रही है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के प्रस्ताव के मुताबिक करीब ₹3,500 करोड़ की लागत से Automated People Mover (APM) सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके 2030 तक तैयार होने की उम्मीद है। T1 से T3 के बीच करीब 7.3 किलोमीटर के इस रूट पर यात्रा में लगभग 13 मिनट लगेंगे।
DIAL के CEO प्रदीप पणिक्कर के मुताबिक परियोजना के डिजाइन पर काम चल रहा है और कंसल्टेंट की नियुक्ति हो चुकी है। निर्माण शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में करीब 30 महीने लगने का अनुमान है। मौजूदा योजना के अनुसार निर्माण अगले साल शुरू किया जा सकता है।
7.3 किलोमीटर लंबा होगा APM रूट
प्रस्तावित APM सिस्टम की कुल लंबाई करीब 7.3 किलोमीटर होगी। इसमें लगभग 5.3 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड और करीब 2 किलोमीटर हिस्सा जमीन पर होगा।
इस सिस्टम में छह स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह T1 और T3 के साथ एयरपोर्ट के कार्गो क्षेत्र और एयरोसिटी को भी जोड़ेगा। एयरोसिटी के पास यह सिस्टम मौजूदा एयरपोर्ट मेट्रो नेटवर्क से कनेक्ट होगा। हालांकि, DIAL के अनुसार APM स्टेशन और मेट्रो स्टेशन के बीच सीधे प्लेटफॉर्म-टू-प्लेटफॉर्म कनेक्शन के बजाय पास में इंटरचेंज की व्यवस्था होगी।
हर 10 मिनट में मिलेगी ट्रेन
मास्टर प्लान के अनुसार APM ट्रेनें शुरुआती तौर पर करीब 10 मिनट के अंतराल पर चलाने की योजना है। T1 से T3 के बीच यात्रा का समय करीब 13 मिनट रखा गया है।
अभी T1 और T3 के बीच आने-जाने के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। ट्रैफिक के कारण इस सफर में समय बढ़ सकता है। प्रस्तावित APM का उद्देश्य एयरपोर्ट परिसर के भीतर टर्मिनलों के बीच यात्रा को अधिक व्यवस्थित करना है।
DIAL के मुताबिक शुरुआती वर्ष में इस सिस्टम से करीब 55,000 यात्री प्रतिदिन यात्रा कर सकते हैं। पूरी क्षमता तक पहुंचने पर यह संख्या करीब 85,000 यात्री प्रतिदिन तक होने का अनुमान है।
टर्मिनल-2 को मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए टनल का काम
एयरपोर्ट के भीतर एक अलग कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है। टर्मिनल-2 को एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ने वाली पैदल यात्री सुरंग (pedestrian tunnel) का निर्माण जारी है और इसके जल्द पूरा होने की उम्मीद है। यह टनल यात्रियों को सड़क पर आए बिना T2 और मेट्रो स्टेशन के बीच आने-जाने में सुविधा देगी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह ₹3,500 करोड़ वाली APM परियोजना से अलग टनल प्रोजेक्ट है। APM की अनुमानित लागत करीब ₹3,500 करोड़ है, जबकि T2-मेट्रो कनेक्शन वाली पैदल सुरंग का खर्च इस आंकड़े में शामिल होने की जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं दी गई है।
एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की भी तैयारी
APM योजना IGI एयरपोर्ट के बड़े विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा है। DIAL के नए मास्टर प्लान में 2036 तक बढ़ती यात्री मांग को देखते हुए एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की योजनाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2029 के अंत तक एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता मौजूदा करीब 10.6 करोड़ से बढ़कर 12.5 करोड़ करने का लक्ष्य है। इसके लिए टर्मिनल-3 पर नया पियर बनाने समेत कई विस्तार कार्य प्रस्तावित हैं।
टर्मिनल-3 की क्षमता बढ़ाने के साथ चेक-इन काउंटर, सुरक्षा जांच मशीनों और विमान पार्किंग स्टैंड की संख्या बढ़ाने की भी योजना है। DIAL के मास्टर प्लान में विमान पार्किंग स्टैंड को 230 से बढ़ाकर 260 करने का प्रस्ताव बताया गया है।
कब शुरू होगी ड्राइवरलेस ट्रेन?
फिलहाल APM सिस्टम निर्माणाधीन यात्री सेवा नहीं है, बल्कि परियोजना के डिजाइन और अन्य तकनीकी तैयारियों पर काम चल रहा है। DIAL के अनुसार निर्माण शुरू होने के बाद करीब 30 महीने में इसे पूरा करने का अनुमान है।
मौजूदा जानकारी के मुताबिक सेवा 2030 तक शुरू होने की उम्मीद है। 7 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में इसके दिसंबर 2030 तक तैयार होने का भी उल्लेख किया गया है। इसलिए फिलहाल इसे तय संचालन तारीख के बजाय प्रस्तावित समयसीमा के रूप में देखना उचित है।
मुख्य तथ्य एक नजर में:
- परियोजना: Automated People Mover (APM)
- अनुमानित लागत: करीब ₹3,500 करोड़
- रूट की लंबाई: करीब 7.3 किलोमीटर
- प्रस्तावित स्टेशन: 6
- T1 से T3 यात्रा समय: करीब 13 मिनट
- ट्रेन की शुरुआती आवृत्ति: लगभग हर 10 मिनट
- एलिवेटेड हिस्सा: करीब 5.3 किलोमीटर
- जमीन पर हिस्सा: करीब 2 किलोमीटर
- शुरुआती अनुमानित यात्री क्षमता: 55,000 प्रतिदिन
- अधिकतम अनुमानित क्षमता: 85,000 प्रतिदिन
- लक्षित शुरुआत: 2030
फैक्ट-चेक नोट: उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में ₹3,500 करोड़ का आंकड़ा APM/इंटर-टर्मिनल ट्रेन परियोजना से संबंधित है। T2 और एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन के बीच बन रही पैदल सुरंग अलग परियोजना है; उसका खर्च ₹3,500 करोड़ में शामिल होने की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती।