नई दिल्ली: दिल्ली में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को सोमवार सुबह पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी रविवार रात से थाने के बाहर जुटे हुए थे और 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित बदसलूकी और यौन उत्पीड़न की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे।
यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। तीन महिलाओं, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया, ने पुलिसकर्मियों पर हिरासत के दौरान बदसलूकी और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रातभर थाने के बाहर डटे रहे प्रदर्शनकारी
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने रविवार रात संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर डेरा डाले रखा और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सोमवार सुबह पुलिस ने उन्हें वहां से हटाना शुरू किया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
इंडिया टुडे के अनुसार, प्रदर्शन में पत्रकारों और YouTubers समेत अन्य लोग शामिल थे। वे शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वे रातभर थाने के बाहर बैठे रहे और बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
महिला पत्रकारों की शिकायत क्राइम ब्रांच को भेजी गई
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में कानून-व्यवस्था संभालने के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। पुलिस के अनुसार, शिकायतें प्राप्त होने के बाद उन्हें क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के लिए भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायतकर्ताओं की मेडिकल जांच भी कराई गई है। क्राइम ब्रांच अब शिकायतकर्ताओं और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज करने के साथ उपलब्ध वीडियो फुटेज की जांच करेगी। पुलिस ने संबंधित घटना की कोई फुटेज रखने वाले लोगों से उसे जांच एजेंसी के साथ साझा करने की अपील भी की है।
3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने प्रदर्शन का प्रयास किया था। दिल्ली पुलिस ने इलाके में लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हटाया था। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
पुलिस के अनुसार, उस समय इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने तीन एफआईआर भी दर्ज की थीं। इनमें से दो संसद मार्ग थाने और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई थी।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी आगे की कार्रवाई
महिला पत्रकारों की शिकायत अब क्राइम ब्रांच के पास है। इसलिए पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल प्रदर्शनकारी शिकायत पर एफआईआर की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के लिए भेजी जा चुकी है।
सोमवार सुबह संसद मार्ग थाने के बाहर हुई हिरासत की कार्रवाई इसी विवाद के बीच हुई है। मामले में अब क्राइम ब्रांच की जांच और शिकायत पर आगे की कानूनी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
संपादकीय नोट: महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न/बदसलूकी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने शिकायतें दर्ज कर उन्हें क्राइम ब्रांच को निष्पक्ष जांच के लिए भेजा है; इसलिए आरोपों को इस लेख में स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिखा गया है।