अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता को लेकर जल्द समझौता होने का संकेत दिया है। 20 अक्टूबर को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि दोनों देश व्यापार समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित समझौता अमेरिका के पहले किए गए व्यापार करारों से काफी अलग होगा।
ट्रंप ने भारत के साथ डील को लेकर कहा कि दोनों पक्ष समझौता करना चाहते हैं और वे इसके काफी करीब हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यह पहले किए गए समझौतों से “बहुत अलग तरह का समझौता” होगा।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बढ़ी रफ्तार
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के दौरे पर हैं। रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुंबई में बातचीत की है। दोनों देशों के बीच व्यापार के साथ-साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।
रुबियो ने भी व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। The Indian Express को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि डील को अंतिम रूप देने की दिशा में काफी काम हो चुका है और दोनों देश इसके करीब हैं।
फरवरी में बनी थी अंतरिम समझौते की रूपरेखा
भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए रूपरेखा पर सहमति की थी। दोनों देशों के संयुक्त बयान के अनुसार, इसका उद्देश्य पारस्परिक और संतुलित व्यापार के आधार पर बाजार पहुंच बढ़ाना और सप्लाई चेन को मजबूत करना था।
उस रूपरेखा में भारत की ओर से कई अमेरिकी औद्योगिक, कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क कम करने या हटाने की प्रतिबद्धता शामिल थी। इसके बदले अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर 18 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क दर लागू करने की बात कही थी और कुछ उत्पादों को अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई थी।
हालांकि, इसके बाद अमेरिकी tariff policy में बदलाव और दूसरे मुद्दों के कारण बातचीत आगे भी जारी रही। अक्टूबर की शुरुआत में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा था कि वार्ता अंतिम चरण में है, लेकिन समझौते पर हस्ताक्षर तत्काल होने वाले नहीं हैं क्योंकि कुछ मुद्दे अभी सुलझाए जाने बाकी हैं।
भारत भी प्रतिस्पर्धी टैरिफ पर जोर दे रहा है
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल के महीनों में यह स्पष्ट किया है कि किसी व्यापार समझौते का आकलन केवल शुल्क की दर से नहीं, बल्कि दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों को मिलने वाली दरों के मुकाबले किया जाना चाहिए। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत चाहता है कि उसके निर्यातकों को प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच और शुल्क की स्थिति मिले।
15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, गोयल ने कहा था कि भारत-अमेरिका समझौते का पहला चरण अंतिम रूप देने के करीब है और कानूनी मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया बाकी है। वहीं, भारत ने यह भी संकेत दिया है कि बदलती वैश्विक व्यापार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समझौते के ढांचे को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अब आगे क्या?
ट्रंप के ताजा बयान और रुबियो की भारत यात्रा से बातचीत में तेजी के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन अभी तक भारत और अमेरिका ने अंतिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। इसलिए डील को अंतिम रूप दिया जा चुका है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।
फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी शेष मुद्दों पर बातचीत कर रहे हैं। अंतिम समझौते में टैरिफ, बाजार पहुंच और अन्य व्यापारिक शर्तों का स्वरूप क्या होगा, यह आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।