गुवाहाटी के होटल बिलास इन गोलीकांड के मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई (34) की बुधवार, 4 नवंबर को असम के शिवसागर जिले में पुलिस फायरिंग के दौरान मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, गोगोई को एक अन्य मामले में पूछताछ के सिलसिले में शिवसागर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उसने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनकर हिरासत से भागने की कोशिश की। इस दौरान हुई झड़प में पुलिस ने गोली चलाई। घायल गोगोई को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। गुवाहाटी के होटल में हुई पिछली गोलीबारी में पांच लोगों की जान गई थी।
शिवसागर में कैसे हुई पुलिस फायरिंग?
असम पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह घटना शिवसागर जिले के गौरीसागर इलाके में तड़के करीब 3 बजे हुई। गोगोई को एक अलग मामले के सिलसिले में गुवाहाटी से शिवसागर ले जाया जा रहा था।
शिवसागर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पापोरी चेतिया ने बताया कि रास्ते में गोगोई ने पुलिस वाहन रुकवाया और शौच के लिए नीचे उतरने की अनुमति मांगी। इसी दौरान उसने मामले के जांच अधिकारी की सर्विस पिस्टल छीनने की कोशिश की।
पुलिस के मुताबिक, इस दौरान हाथापाई हुई और संबंधित अधिकारी घायल हो गया। अधिकारी की सुरक्षा के लिए पुलिस टीम के एक अन्य सदस्य को गोली चलानी पड़ी। गोली लगने से गोगोई घायल हो गया। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस अधिकारी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम के बारे में फिलहाल पुलिस की ओर से दी गई जानकारी ही उपलब्ध है। मुठभेड़ की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरे मामले में शिवसागर ले जाया जा रहा था गोगोई
गोगोई की मौत से पहले मंगलवार को गुवाहाटी की अदालत ने उसे होटल गोलीकांड में पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
इसके बाद शिवसागर पुलिस ने उसे वर्ष 2024 के एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया। इसी मामले के सिलसिले में उसे शिवसागर ले जाया जा रहा था, जहां रास्ते में पुलिस फायरिंग की घटना हुई।
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शिवसागर की एसएसपी पापोरी चेतिया ने इस घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, गोगोई को गोली लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया था।
26 अक्टूबर को होटल बिलास इन में हुई थी गोलीबारी
गुवाहाटी के बोरा सर्विस इलाके में स्थित होटल बिलास इन में 26 अक्टूबर की रात गोलीबारी हुई थी। इस घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ था।
पुलिस की शुरुआती जांच में होटल के प्रबंधन और आर्थिक लेन-देन को लेकर विवाद को गोलीबारी की संभावित वजह बताया गया था। गोगोई ने होटल को लीज पर लिया हुआ था और होटल के मालिक परिवार के साथ उसका विवाद चल रहा था।
इस मामले में पुलिस ने गोगोई को मुख्य आरोपी बनाया था। घटना के बाद उसने गुवाहाटी के बशिष्ठ पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण किया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के साथ एक लाइसेंसी .32 बोर पिस्तौल भी बरामद की थी, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर गोलीबारी में किया गया था।
गोलीबारी में एक ही परिवार के चार सदस्यों की हुई थी मौत
होटल में हुई फायरिंग में जान गंवाने वालों में होटल की सह-मालकिन हेलेना भराली (58), उनके भाई भूदेव भराली (65), हेलेना के बेटे देबर्षि कश्यप (39) और बहू रिनिका कश्यप (30) शामिल थे।
इसके अलावा परिवार से जुड़े कर्मचारी नारायण दास (48) की भी गोलीबारी में मौत हो गई थी। परिवार के ड्राइवर सत्येंद्र पाठक इस घटना में घायल हुए थे और उन्हें इलाज के लिए गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
इस मामले की जांच के लिए असम पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। पुलिस ने होटल में घटनाक्रम को समझने के लिए आरोपी की मौजूदगी में अपराध स्थल का पुनर्निर्माण भी कराया था।
अब जांच में किन पहलुओं पर रहेगी नजर?
मुख्य आरोपी की मौत के बाद होटल गोलीकांड की जांच से जुड़े कई सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। खास तौर पर होटल के लीज समझौते, प्रबंधन को लेकर हुए विवाद और गोलीबारी के पीछे की परिस्थितियों की जांच का महत्व बना हुआ है।
इसके अलावा शिवसागर में पुलिस हिरासत के दौरान हुई फायरिंग की परिस्थितियां भी जांच का विषय हैं। पुलिस के दावे के अनुसार, गोगोई ने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की थी। इस घटना में घायल पुलिस अधिकारी की स्थिति और पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक जांच से जुड़े विवरण भी सामने आना बाकी हैं।
संपादकीय सत्यापन नोट: आरोपी की मौत और पुलिस के दावे की जानकारी कई समाचार रिपोर्टों में उपलब्ध है। हालांकि, पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों पर कोई स्वतंत्र जांच रिपोर्ट इस सामग्री के लिए सत्यापित नहीं हो सकी है। इसलिए पुलिस के दावे को स्पष्ट रूप से पुलिस के हवाले से प्रस्तुत किया गया है।