हरिद्वार, 10 अक्टूबर। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को आंधी, तेज बारिश और भारी ओलावृष्टि से कई इलाकों में नुकसान हुआ। कुछ स्थानों पर करीब 500 ग्राम तक वजन के ओले गिरने की खबर है। ओलों की चपेट में आने से कई वाहनों के शीशे टूट गए और सोलर पैनल क्षतिग्रस्त हो गए। खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
सुबह करीब 10:30 बजे बदला मौसम
स्थानीय समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे हरिद्वार और आसपास के इलाकों में मौसम अचानक बदल गया। आसमान में काले बादल छाने के बाद तेज हवा और बारिश शुरू हो गई। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में बड़े आकार के ओले गिरने लगे।
सिडकुल, रोशनाबाद, ज्वालापुर, बहादराबाद, पथरी और जमालपुर कलां सहित कई इलाकों में ओलावृष्टि की सूचना मिली। खुले में खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा। ज्वालापुर और सिडकुल में भी गाड़ियों के शीशे टूटने की खबर सामने आई। बड़े ओले गिरने के दौरान लोग बचने के लिए दुकानों और अन्य सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।
सोलर पैनल और बिजली व्यवस्था को नुकसान
ओलावृष्टि का असर सौर ऊर्जा संयंत्र पर भी पड़ा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पथरी विद्युत गृह के पास उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएन लिमिटेड) के 500 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र में करीब 2,000 सोलर मॉड्यूल लगे हैं। शुरुआती आकलन में इनमें से 142 मॉड्यूल क्षतिग्रस्त पाए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, संयंत्र को हुए कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अन्य उपकरणों की स्थिति की भी जांच की जा रही है। अंतिम नुकसान का आंकड़ा विस्तृत निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।
आंधी के दौरान शिवालिक नगर और नवोदय नगर में बिजली के खंभे उखड़ने तथा बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई। कुछ ग्रामीण इलाकों में पेड़ बिजली के तारों पर गिरने से आपूर्ति बाधित हुई। अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया कि मरम्मत के बाद प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
धान और गन्ने की फसल पर भी मार
हरिद्वार के ग्रामीण इलाकों में किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। पथरी क्षेत्र में तेज हवा और ओलावृष्टि से गन्ने की खड़ी फसल गिरने और धान की फसल प्रभावित होने की जानकारी मिली है। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल की गुणवत्ता खराब होने की आशंका भी जताई गई है।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, कई गांवों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, पूरे जिले में कितने क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई और किसानों को कुल कितना आर्थिक नुकसान हुआ, इसका अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है। वास्तविक स्थिति का पता सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही चलेगा।
प्रशासन ने नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने उपजिलाधिकारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को फसलों की क्षति का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए कहा गया।
फिलहाल सोलर मॉड्यूल, वाहनों और फसलों को हुए नुकसान के अंतिम आंकड़ों का इंतजार है। प्रभावित किसानों और अन्य लोगों को कितनी राहत मिलेगी, यह सर्वेक्षण तथा प्रशासन की आगे की कार्रवाई के बाद स्पष्ट होगा।