सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा मजबूत करने और पूर्वोत्तर भारत तक सैन्य आवाजाही बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार विभिन्न बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम कर रही है। 9 अक्टूबर 2026 को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट में चार परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि इनके 2029 तक पूरा होने पर सेना की आवाजाही में लगने वाला समय 12 से 18 घंटे से घटकर करीब तीन घंटे रह सकता है। हालांकि, इन चारों परियोजनाओं, उनकी निर्धारित समयसीमा और यात्रा समय में प्रस्तावित कमी की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों से नहीं हो सकी है।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्यों महत्वपूर्ण है?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित एक संकरा भूभाग है, जिसे आमतौर पर चिकन नेक भी कहा जाता है। यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख जमीनी संपर्क मार्ग है। इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण सड़क, रेल और सैन्य आवाजाही के वैकल्पिक रास्तों का विकास सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जाता है।
कॉरिडोर के आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाएं हैं, जबकि चीन का तिब्बत क्षेत्र भी इस व्यापक सीमावर्ती भूगोल के करीब है। इस कारण यहां परिवहन नेटवर्क की क्षमता, संपर्क मार्गों की उपलब्धता और आपात स्थिति में आवाजाही बनाए रखना रणनीतिक महत्व रखता है।
डोकलाम विवाद के बाद सुरक्षा पर बढ़ा ध्यान
भारत और चीन के बीच 2017 में डोकलाम क्षेत्र में सैन्य गतिरोध हुआ था। इस घटनाक्रम के बाद सीमावर्ती इलाकों में सड़क, रेल और अन्य सैन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत पर ध्यान दिया गया।
रक्षा मंत्रालय की 31 दिसंबर 2025 को जारी वार्षिक समीक्षा में सिलीगुड़ी कॉरिडोर में मौजूदा संपर्क मार्गों के विकल्प विकसित करने और भीड़भाड़ कम करने से जुड़े उपायों का उल्लेख किया गया था। दस्तावेज में सैन्य बलों की जरूरतों के लिए बुनियादी ढांचा, सैनिकों के आवास, तकनीकी सुविधाओं और दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर करने के कामों की भी जानकारी दी गई है।
हालांकि, इस सरकारी दस्तावेज से 2029 तक पूरी होने वाली उन्हीं चार परियोजनाओं की सूची या सेना की आवाजाही तीन घंटे तक सीमित करने के दावे की पुष्टि नहीं होती।
2029 तक पूरा करने के दावे में क्या जानकारी सामने आई?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्देश्य सिलीगुड़ी कॉरिडोर और सिक्किम क्षेत्र में सैन्य आवाजाही को तेज करना तथा अहम संपर्क मार्गों को अधिक सुरक्षित बनाना है। रिपोर्ट में भूमिगत रेल सुरंग और कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट में बताए गए प्रमुख विवरण इस प्रकार हैं:
- भूमिगत रेल सुरंग: रिपोर्ट में लगभग 36 किलोमीटर लंबी सुरंग का उल्लेख है। इसके मार्ग, स्वीकृत लागत और आधिकारिक निर्माण समयसीमा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
- बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था: रिपोर्ट में सिलीगुड़ी क्षेत्र के लिए सात स्तरों वाली रक्षा व्यवस्था का दावा किया गया है। इसकी आधिकारिक परियोजना रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है।
- कमांड और संचार सुविधाएं: सैन्य संचालन के लिए भूमिगत कमांड सेंटर तथा संचार ढांचे का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है। इनकी संख्या, निर्माण स्थिति और स्वीकृत विनिर्देशों की पुष्टि आवश्यक है।
- सैन्य आवाजाही का समय: रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाएं पूरी होने पर भारी तोपों और सैन्य दस्तों को सीमा तक पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। तीन घंटे की समयसीमा को फिलहाल आधिकारिक रूप से पुष्ट आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
इन विवरणों को परियोजनाओं की अंतिम स्वीकृत स्थिति के बजाय मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।
सरकारी रिकॉर्ड में क्या पुष्टि होती है?
रक्षा मंत्रालय की वर्ष 2025 की समीक्षा के अनुसार, सिलीगुड़ी कॉरिडोर में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक परिवहन मार्गों और भीड़भाड़ कम करने के उपायों पर काम किया जा रहा है। सैन्य संचालन के लिए आवश्यक सुविधाओं और दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क बेहतर करने पर भी जोर दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय की 22 अगस्त 2026 की प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा की समीक्षा किए जाने की जानकारी दी गई है। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सेना, सीमा सुरक्षा बल, सशस्त्र सीमा बल तथा रेलवे सुरक्षा बल के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। बैठक में कॉरिडोर से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई।
ये सरकारी रिकॉर्ड क्षेत्र की सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों की पुष्टि करते हैं, लेकिन चार परियोजनाओं के नाम, उनकी कुल लागत और 2029 तक पूरा होने की संयुक्त समयसीमा की पूरी पुष्टि नहीं करते।
आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बुनियादी ढांचे का विकास पूर्वोत्तर भारत के साथ संपर्क बनाए रखने और सैन्य जरूरतों के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराने के लिहाज से अहम है। लेकिन परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और उनके संभावित लाभ का आकलन करने के लिए संबंधित मंत्रालयों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, स्वीकृति आदेश, निर्माण की समयसीमा और आधिकारिक प्रगति विवरण जरूरी होंगे।
फिलहाल, सेना की आवाजाही का समय 18 घंटे से घटाकर तीन घंटे करने और सभी चार परियोजनाओं के 2029 तक पूरा होने के दावों को स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि मिलने तक संभावित लक्ष्य के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।