दिल्ली में गुरुद्वारा बंगला साहिब में कथित हंगामे को लेकर दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं और विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। यह कार्रवाई दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) की शिकायत के बाद की गई। कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के परिसर में राजनीतिक नारेबाजी की और घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रसारित किए। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
यह मामला 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इस दौरान बंगला साहिब गुरुद्वारे के परिसर में प्रदर्शनकारियों की मौजूदगी को लेकर विवाद सामने आया।
DSGMC की शिकायत पर दर्ज हुई FIR
इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका सहित कमेटी के पदाधिकारियों ने पुलिस को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ लोग गुरुद्वारे में प्रवेश करने के बाद पोस्टर निकालकर नारेबाजी करने लगे।
कमेटी का कहना है कि धार्मिक स्थल के परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। शिकायत में घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले में उपलब्ध वीडियो फुटेज की भी जांच की जा रही है।
गुरुद्वारे में प्रदर्शन को लेकर क्या है विवाद?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान दिल्ली और अन्य राज्यों से आए सैकड़ों लोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में राजधानी में जुटे थे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी।
रिपोर्ट में DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के हवाले से बताया गया कि गुरुद्वारे में आए लोगों को पहले प्रवेश दिया गया, उन्हें लंगर उपलब्ध कराया गया और ठहरने की जगह भी दी गई। हालांकि, कालका ने आरोप लगाया कि बाद में कुछ लोगों ने अपने बैग से पोस्टर निकाले और परिसर में प्रदर्शन शुरू कर दिया।
कमेटी ने इस गतिविधि पर आपत्ति जताते हुए पुलिस से शिकायत की। फिलहाल, इन आरोपों की जांच जारी है और पुलिस की जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।
AAP और पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस घटनाक्रम में गुरुद्वारे के भीतर पुलिस की मौजूदगी को लेकर भी विवाद हुआ। जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पुलिसकर्मियों के गुरुद्वारे में प्रवेश करने पर आपत्ति जताई थी। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए पुलिस गुरुद्वारे के परिसर में पहुंची थी।
दूसरी ओर, DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने धार्मिक परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा जरूरतमंदों और प्रदर्शनकारियों को आश्रय दे सकता है, लेकिन परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक प्रदर्शन के लिए नहीं होना चाहिए।
इस तरह मामले में दो प्रमुख मुद्दे सामने आए हैं—गुरुद्वारे के परिसर में कथित राजनीतिक नारेबाजी और प्रदर्शनकारियों को लेकर पुलिस की कार्रवाई।
अब आगे क्या होगा?
दिल्ली पुलिस की जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों, संबंधित वीडियो फुटेज और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि घटना में किन लोगों की क्या भूमिका थी और उनके खिलाफ आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर दर्ज होना आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं है। अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही परखा जाएगा। इस मामले में पुलिस की विस्तृत आधिकारिक जानकारी और जांच के अगले अपडेट का इंतजार है।