कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी में विरोध की आवाज दबाने के लिए ट्रेन और बसों की आवाजाही रोकी जा रही है और प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ मारपीट की गई। महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, ट्रेन-बसों को रोकने और महिलाओं के साथ मारपीट के हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।
दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर राहुल गांधी का बयान
राहुल गांधी ने 10 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में कांग्रेस के छात्र अभियान ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों का मुद्दा उठाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में इंटरनेट बंद किया गया और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस तथा भाजपा से जुड़े लोगों ने पीटा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि छात्रों को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अधिकार है।
ये आरोप राहुल गांधी की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों पर केंद्र सरकार या भाजपा का विस्तृत जवाब शामिल नहीं है।
चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर बढ़ा विवाद
दिल्ली में हाल के दिनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका गया। कई स्थानों पर पुलिस ने लोगों को हिरासत में लिया और राजधानी के कुछ इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।
रॉयटर्स की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दिल्ली के छह मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और 20 से अधिक मार्गों पर यातायात प्रतिबंध तथा डायवर्जन लागू किए गए। अधिकारियों ने ये कदम सुरक्षा कारणों से उठाए। रिपोर्ट में कांग्रेस की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की योजना का भी उल्लेख है।
महिलाओं के साथ मारपीट के आरोप
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बना हुआ है। राहुल गांधी के बयान से संबंधित खबरों में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और युवाओं के साथ मारपीट के आरोपों का उल्लेख है।
हालांकि, महिलाओं के साथ मारपीट के दावे के संबंध में उपलब्ध स्रोतों से सभी घटनाओं, संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार लोगों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इन आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग और भाजपा ने क्या कहा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने इस आरोप को खारिज किया है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के लिए की गई। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं।
भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वैध चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट और सार्वजनिक परिवहन रोकने के आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का विस्तृत जवाब उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं है।
आगे क्या होगा?
12 अक्टूबर को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना की घोषणा की थी। कांग्रेस की मांगों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए गए सवालों पर कार्रवाई और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।
इस बीच, दिल्ली में प्रदर्शन, सुरक्षा प्रतिबंधों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है। आगे की स्थिति अदालत की कार्यवाही, प्रशासन के फैसलों और प्रदर्शनकारियों की अगली रणनीति पर निर्भर करेगी।
सत्यापन नोट: राहुल गांधी द्वारा दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की आलोचना करने की पुष्टि समाचार रिपोर्टों से होती है। लेकिन ट्रेन और बसों को रोकने, महिलाओं के साथ मारपीट तथा पुलिसकर्मियों द्वारा कथित तौर पर कही गई बात की हूबहू पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए पुलिस के कथित बयान को प्रत्यक्ष उद्धरण के रूप में शामिल नहीं किया गया है।