भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट देखने को मिली। 23 अक्टूबर 2026 को Sensex 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 करीब 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 22,600 के स्तर पर आ गया। चार कारोबारी सत्रों में BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹20.79 लाख करोड़ घटकर ₹451.83 लाख करोड़ रह गया। कुछ बाजार आंकड़ों में चार सत्रों का नुकसान करीब ₹21.63 लाख करोड़ भी बताया गया है, जो गणना के समय और BSE के मार्केट-कैप डेटा में अंतर से जुड़ा है।
इस गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कुछ बड़े शेयरों के कमजोर तिमाही नतीजे और Jio Platforms IPO से जुड़ी liquidity concerns ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
1. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
इस समय भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत बनी हुई है। 23 अक्टूबर को Brent crude करीब 114 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। PTI के मुताबिक, कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर भी गई और पांच महीने के उच्च स्तर को छुआ।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। बाजार में यह चिंता खास तौर पर उन कंपनियों के लिए बढ़ी है जिनकी लागत कच्चे तेल और ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होती है।
2. पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़े सैन्य तनाव ने तेल की सप्लाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई है। Reuters के मुताबिक, क्षेत्र में घटनाक्रम के बीच Brent crude करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा। इससे निवेशकों में महंगाई और कंपनियों की कमाई पर असर को लेकर चिंता बढ़ी।
ऊर्जा कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने की स्थिति में भारत जैसे तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि बाजार में geopolitical developments पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी लगातार दबाव बना रही है। 21 अक्टूबर की बाजार रिपोर्ट में FII selling के साथ बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को भी sentiment कमजोर करने वाला कारण बताया गया था।
ऊंची अमेरिकी bond yields और मजबूत डॉलर की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी assets अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं। इससे emerging markets से पैसा निकलने का दबाव बढ़ सकता है। भारतीय बाजार में भी लगातार FII outflows ने खरीदारी के मुकाबले बिकवाली का दबाव बढ़ाया है।
4. बैंकिंग और कुछ बड़े शेयरों में बिकवाली
गिरावट सिर्फ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। 21 अक्टूबर को banking और financial stocks में बिकवाली बाजार पर भारी पड़ी थी। 23 अक्टूबर की गिरावट के दौरान भी कई बड़े शेयर दबाव में रहे।
Reuters के मुताबिक, कमजोर तिमाही नतीजों के बाद HDFC Bank, Axis Bank और Bajaj Finance जैसे शेयरों में भी गिरावट दर्ज हुई। HDFC Bank करीब 5 फीसदी, Axis Bank 5.6 फीसदी और Bajaj Finance 5.4 फीसदी नीचे रहा।
बैंकिंग और financial stocks का प्रमुख सूचकांकों में बड़ा weight होने के कारण इन शेयरों में तेज गिरावट का असर Sensex और Nifty दोनों पर पड़ता है।
5. Jio IPO और बाजार में liquidity का दबाव
इस सप्ताह Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO भी निवेशकों के लिए बड़ा event रहा। 21 अक्टूबर को पहले दिन यह इश्यू करीब तीन गुना subscribe हुआ और 100 मिनट में पूरी तरह subscribe होने वाला भारत का सबसे तेज IPO बताया गया।
Reuters के अनुसार, Jio Platforms IPO के लिए निवेशकों की मजबूत मांग ने बाजार की liquidity पर भी दबाव बढ़ाया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 3.2 अरब डॉलर के इस IPO की मांग के बीच बाजार में उपलब्ध पूंजी का एक हिस्सा प्राथमिक बाजार की ओर गया।
हालांकि, केवल Jio IPO को बाजार की चार दिन की गिरावट का कारण बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों से साफ है कि IPO के साथ crude oil, geopolitical tensions, FII outflows और कमजोर earnings जैसे कई factors एक साथ काम कर रहे थे।
चार दिनों में बाजार की तस्वीर
23 अक्टूबर की गिरावट के साथ Sensex लगातार चौथे कारोबारी सत्र नीचे बंद हुआ। पूरे holiday-shortened सप्ताह में Sensex 1,605.44 अंक यानी 2.15 फीसदी गिरा। Nifty 50 भी सप्ताह में करीब 2.4 फीसदी नीचे रहा।
Broad market में दबाव और ज्यादा रहा। Reuters के अनुसार, सप्ताह के दौरान Nifty Smallcap 100 में करीब 7.3 फीसदी और Midcap 100 में 5.6 फीसदी की गिरावट आई। 16 प्रमुख sectors में से 15 में साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई।
आगे बाजार के लिए क्या अहम रहेगा?
अब बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, crude oil की कीमत, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों से प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा रुपये और डॉलर की चाल तथा वैश्विक bond yields पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि चार दिनों की गिरावट के पीछे किसी एक घटना को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कई घरेलू और वैश्विक दबावों को देखना होगा। निवेशकों के लिए अगले कारोबारी सत्रों में crude oil और FII flows बाजार के प्रमुख संकेतक बने रह सकते हैं।