बिहार के सीवान जिले में पटाखे बनाने के दौरान हुए भीषण विस्फोट में कम से कम पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। यह हादसा शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 की शाम जामो थाना क्षेत्र के अलमापुर गांव में एक मकान के अंदर हुआ, जहां पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। धमाके की तीव्रता से मकान का बड़ा हिस्सा ढह गया और मलबा सड़क तक फैल गया। घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर सामने आया है।
रिहायशी इलाके में पटाखे बनाने के दौरान हुआ विस्फोट
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे की है। अलमापुर गांव में पटाखे बनाने और रखने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मकान में आग लगने के बाद विस्फोट हुआ। इसके बाद वहां रखे अन्य पटाखों में भी आग लगने से लगातार धमाके होने लगे।
विस्फोट इतना तेज था कि मकान का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इमारत का मलबा आसपास की सड़क पर फैल गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, धमाकों की आवाज काफी देर तक रुक-रुककर सुनाई देती रही।
जिस मकान में यह घटना हुई, वह घनी आबादी वाले इलाके में स्थित था। ऐसे में विस्फोट से आसपास के लोगों में भी दहशत फैल गई। घटनास्थल पर पुलिस, दमकलकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। आग पर काबू पाने और मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया गया।
मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट
सीवान के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी के हवाले से आकाशवाणी की 24 अक्टूबर की रिपोर्ट में पांच लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। वहीं, कुछ अन्य समाचार रिपोर्टों में मृतकों की संख्या छह या सात बताई गई है। इस अंतर के कारण मृतकों की अंतिम संख्या को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
मृतकों में पटाखा कारोबारी के परिवार के सदस्य और मजदूर शामिल बताए गए हैं। हालांकि, सभी मृतकों की पहचान और उनकी पारिवारिक स्थिति के बारे में उपलब्ध रिपोर्टों में एक जैसी जानकारी नहीं है।
प्रशासन ने घटनास्थल पर जांच और मलबे की तलाशी कराई। विस्फोट की तीव्रता के कारण मकान को काफी नुकसान पहुंचा, जिससे राहत कार्य में भी चुनौती आई।
पटाखा निर्माण की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था की जांच
हादसे के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि रिहायशी इलाके में पटाखे बनाने और उनका भंडारण करने की व्यवस्था किन शर्तों के तहत चल रही थी। अधिकारियों ने इस बात की जांच शुरू की है कि संबंधित इकाई के पास वैध लाइसेंस था या नहीं और सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन ने लाइसेंस और पटाखा निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की बात कही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि विस्फोट किस वजह से हुआ और क्या किसी स्तर पर निगरानी में लापरवाही हुई थी।
जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से घटनास्थल पर जांच के लिए टीमें भेजी गईं। फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई की।
थाना प्रभारी और चौकीदार निलंबित
आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, सीवान के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने मामले की जांच के लिए महाराजगंज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की है।
घटना के संबंध में जामो थाना प्रभारी धीरज कुमार को कथित लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मामले में एक पुलिस चौकीदार को भी निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है।
निलंबन को अंतिम दोष निर्धारण नहीं माना जा सकता। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और संबंधित अधिकारियों या अन्य लोगों की कोई जिम्मेदारी बनती है या नहीं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी घटना की वजह
फिलहाल, मामले की जांच में पटाखा निर्माण की अनुमति, विस्फोट के कारण और सुरक्षा मानकों के पालन जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। मृतकों की संख्या और सभी प्रभावित लोगों की स्थिति को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मकान में आग कैसे लगी, विस्फोट किस वजह से हुआ और क्या पटाखों के निर्माण या भंडारण में नियमों का उल्लंघन किया गया था।
संपादकीय सत्यापन नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में मृतकों की संख्या पांच, छह और सात बताई गई है। आकाशवाणी की रिपोर्ट में पांच मौतों की पुष्टि है, जबकि बाद की कुछ खबरों में संख्या अधिक बताई गई है। प्रकाशन से पहले सीवान जिला प्रशासन या पुलिस से मृतकों की अंतिम संख्या, सभी मृतकों की पहचान और लाइसेंस की स्थिति की पुष्टि करना उचित होगा।