नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। हरियाणा के रोहतक जिले से जुड़ा गैंगस्टर हिमांशु भाऊ 17 साल की उम्र में गंभीर आपराधिक मामलों के कारण पुलिस के निशाने पर आया था। जून 2024 में दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग आउटलेट में हुई हत्या के बाद उसका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। अब अमेरिका में उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी खबर सामने आई है। आकाशवाणी समाचार और इंडिया टुडे की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमांशु भाऊ और गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया को 22 अक्टूबर को लास वेगास में अमेरिकी एजेंसियों ने हिरासत में लिया। हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी है।
हिमांशु भाऊ का असली नाम हिमांशु रिटोलिया बताया गया है। दिल्ली और हरियाणा पुलिस की वांछित अपराधियों की सूची में शामिल रहे भाऊ पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, उसके खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस के आरोपों को अदालत में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता।
रोहतक से शुरू हुआ आपराधिक सफर
हिमांशु भाऊ हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव का रहने वाला है। द इंडियन एक्सप्रेस की 29 जून 2024 की विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, उसका नाम पहली बार अप्रैल 2018 में दर्ज एक प्राथमिकी में सामने आया था। उस समय वह करीब 15 साल का था। रिपोर्ट में गांव में शराब के कारोबार को लेकर हुए विवाद का उल्लेख है।
इसके बाद 2020 में, 17 साल की उम्र में, हिमांशु को हत्या के प्रयास से जुड़े एक मामले में हिसार स्थित किशोर सुधार गृह भेजा गया था। उस समय कानून के तहत वह नाबालिग था।
12 अक्टूबर 2020 को हिसार के किशोर सुधार गृह से कई बंदियों के फरार होने की घटना सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 20 बंदी वहां से भागे थे। इनमें हिमांशु और उसका एक रिश्तेदार भी शामिल थे। बाद में 18 बंदियों का पता लगा लिया गया, जबकि हिमांशु और उसका रिश्तेदार पुलिस की पकड़ से बाहर रहे।
किशोर सुधार गृह से फरार होने के बाद हिमांशु का नाम हरियाणा और दिल्ली में दर्ज कई गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़ता गया। पुलिस के अनुसार, उसका नेटवर्क दूसरे राज्यों तक फैला और उसके सहयोगियों के जरिए कथित तौर पर वारदातों को अंजाम दिया जाने लगा।
विदेश में रहने के दौरान भी पुलिस की तलाश
हिमांशु भाऊ के भारत से बाहर जाने के बाद भी भारतीय एजेंसियां उसकी तलाश करती रहीं। जून 2024 में प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को संदेह था कि वह पुर्तगाल में रहकर अपने गिरोह का नेटवर्क चला रहा था।
अगस्त 2023 में उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी किया गया था। आकाशवाणी समाचार की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का आरोप है कि उसने जाली दस्तावेजों की मदद से पासपोर्ट हासिल किया और भारत से बाहर चला गया। इस दावे को पुलिस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिल्ली और हरियाणा में उसके खिलाफ दर्ज मामलों के अलावा, जांच एजेंसियों ने उसके कथित नेटवर्क को संगठित अपराध से जोड़कर देखा है। रिपोर्टों में उसका संबंध नीरज बवाना गिरोह से भी बताया गया है। उसका नाम लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के साथ प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में भी सामने आता रहा है।
बर्गर किंग हत्याकांड से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा
हिमांशु भाऊ का नाम व्यापक रूप से 18 जून 2024 को दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित बर्गर किंग आउटलेट में हुई गोलीबारी के बाद चर्चा में आया। इस घटना में 26 वर्षीय अमन जूण की मौत हो गई थी।
एनडीटीवी की 28 जून 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया था कि तीन लोग मोटरसाइकिल से घटनास्थल पर पहुंचे थे। उनमें से दो आउटलेट के भीतर गए और अमन जूण पर गोलियां चलाईं, जबकि तीसरा व्यक्ति बाहर निगरानी के लिए रुका था। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच की थी।
घटना के बाद सोशल मीडिया पर हिमांशु भाऊ से जुड़े एक पोस्ट में हत्या की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। पोस्ट में वारदात को उसके एक सहयोगी शक्ति दादा की हत्या का बदला बताया गया था। हालांकि, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का दावा अपने आप में किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का न्यायिक प्रमाण नहीं है।
मामले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर शूटरों को घटनास्थल तक पहुंचाने वाले एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया था। इस घटनाक्रम ने दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गिरोहों, उनकी आपसी रंजिश और विदेश में रहकर कथित आपराधिक गतिविधियां संचालित करने के आरोपों पर ध्यान खींचा।
अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद क्या होगा?
24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को अमेरिकी राज्य नेवादा के लास वेगास में 22 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया। इस कार्रवाई में अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की भूमिका बताई गई है। भारतीय एजेंसियों को उनकी तलाश में हरियाणा STF से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है।
आकाशवाणी समाचार के मुताबिक, हरियाणा STF अमेरिकी अधिकारियों और केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में है, ताकि दोनों को भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हिमांशु भाऊ को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया है या उसके खिलाफ दर्ज सभी मामलों में अदालत का फैसला आ चुका है। अमेरिका में हिरासत और भारत में कानूनी कार्रवाई दो अलग-अलग चरण हैं।
हिमांशु भाऊ का मामला अब केवल उसके कथित आपराधिक नेटवर्क तक सीमित नहीं है। उसकी गिरफ्तारी के बाद अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम उसे भारत लाने की प्रक्रिया, संबंधित मामलों में जांच की प्रगति और अदालतों में होने वाली कानूनी कार्रवाई होगी।
संपादकीय सत्यापन नोट: अमेरिका में गिरफ्तारी और भारत लाने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी 24 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। इस लेख के लिए गिरफ्तारी का कोई स्वतंत्र अमेरिकी आधिकारिक रिकॉर्ड या प्रत्यर्पण आदेश सत्यापित नहीं किया जा सका। बर्गर किंग मामले में हिमांशु भाऊ से जुड़ी भूमिका को आरोप और सोशल मीडिया पर किए गए दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि अदालत से सिद्ध अपराध के रूप में।