उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 28 वर्षीय सोनू सविता की हत्या कर शव को एक बड़े बक्से में बंद करके हाईवे किनारे फेंकने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मृतक की पत्नी नेहा रावत, उसके कथित प्रेमी जितेंद्र सिंह और दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि शव को शुक्लागंज के कंचननगर स्थित किराये के कमरे से लोडर में रखकर उन्नाव-लालगंज हाईवे की सर्विस लेन तक ले जाया गया था।
लावारिस बक्सा मिलने के बाद शुरू हुई जांच
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 की रात उन्नाव के सदर क्षेत्र में ललऊखेड़ा के पास हाईवे की सर्विस लेन पर एक बक्सा पड़ा मिला। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। बक्से में युवक का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान बक्सा ले जाने वाले लोडर की पहचान की गई। इसके बाद पुलिस वाहन के चालक तक पहुंची और पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की।
किराये के कमरे में हत्या का आरोप
दैनिक जागरण की 21 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक सोनू सविता हसनगंज क्षेत्र के पंचमखेड़ा गांव का रहने वाला था। वह नेहा रावत के साथ शुक्लागंज के कंचननगर इलाके में रह रहा था। रिपोर्ट में बताया गया है कि नेहा पहले से विवाहित थी और बाद में सोनू के साथ रहने लगी थी। दोनों ने कुछ समय लिव-इन संबंध में रहने के बाद कोर्ट मैरिज की थी।
पुलिस के मुताबिक, नेहा की उसी मकान में किराये पर रहने वाले जितेंद्र सिंह उर्फ राहुल से नजदीकी बढ़ गई थी। इसी वजह से सोनू और नेहा के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। हालांकि, हत्या के पीछे की परिस्थितियों और कथित संबंधों की भूमिका को पुलिस जांच के निष्कर्षों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
बक्से में रखकर लोडर से ले गए शव
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सोनू का शव बक्से में रखा और उसे बाहर ले जाने के लिए लोडर मंगवाया। रिपोर्टों में बताया गया है कि चालक को सामान शिफ्ट करने की बात कहकर बक्सा वाहन में रखवाया गया था। इसके बाद बक्से को ललऊखेड़ा के पास हाईवे की सर्विस लेन पर छोड़ दिया गया।
जांच में सीसीटीवी फुटेज अहम कड़ी बनी। पुलिस ने नेहा, जितेंद्र और दो अन्य लोगों को पकड़ा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पकड़े गए लोगों में एक नाबालिग भी शामिल है। नाबालिग की पहचान प्रकाशित करना उचित नहीं है।
पुलिस जांच में अब किन बातों पर नजर
इस मामले में पुलिस की शुरुआती जांच और मीडिया रिपोर्टों में घटनाक्रम को लेकर कुछ विवरण अलग-अलग सामने आए हैं। इसलिए हत्या का सटीक समय, वारदात में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से किया जाना जरूरी है।
फिलहाल आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले और जांच से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों की उपलब्धता के आधार पर आगे की जानकारी की पुष्टि की जानी चाहिए। गिरफ्तारी या पूछताछ में दिए गए कथित बयानों को अदालत में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं माना जा सकता। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
संपादकीय नोट: प्रकाशन से पहले उन्नाव पुलिस का आधिकारिक बयान, एफआईआर में दर्ज धाराएं और आरोपियों की गिरफ्तारी संबंधी जानकारी सत्यापित कर लें। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में कुछ घटनात्मक विवरणों में अंतर है।
सत्यापन स्थिति: घटना और पुलिस जांच से संबंधित विवरणों को कई समाचार रिपोर्टों से मिलाया गया है। इस जांच में पुलिस का मूल आधिकारिक बयान या प्राथमिकी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी। रिपोर्टों में हत्या के घटनाक्रम और कुछ आरोपियों की भूमिका को लेकर अंतर है। इसलिए प्रकाशन से पहले आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से पुष्टि आवश्यक है।