नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज, 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ करेगी।
पीठ में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं। याचिकाएं पटना निवासी राकेश कुमार सिंह और अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई हैं। इनमें CEC के निलंबन समेत चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को चुनौती दी गई है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ी प्रक्रिया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन फैसलों को दोनों आयुक्तों ने अपनी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता डेटा और उससे जुड़े सॉफ्टवेयर के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल थे। कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने संबंधित प्रक्रिया और अधिकारों को लेकर सवाल उठाए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा था कि आयोग के सभी फैसले, जिसमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि किसी आयुक्त की ओर से व्यक्त की गई व्यक्तिगत राय को आयोग का औपचारिक निर्णय नहीं माना जा सकता।
इसलिए फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि CEC ने वास्तव में अकेले या अन्य चुनाव आयुक्तों की संवैधानिक रूप से आवश्यक भागीदारी के बिना फैसले लिए। यही विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
याचिकाओं में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की बहुसदस्यीय संस्था के रूप में काम करने की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। एक याचिका में अदालत से यह तय करने की मांग की गई है कि क्या आयोग की सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल किसी एक पदाधिकारी द्वारा अन्य सदस्यों की भागीदारी के बिना किया जा सकता है।
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ quo warranto रिट की मांग भी की गई है। साथ ही, यदि अदालत यह पाती है कि आयोग की सामूहिक शक्ति का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं हुआ, तो ऐसे फैसलों को अमान्य घोषित करने की मांग की गई है।
याचिकाओं में SIR और उससे जुड़े फैसलों, निर्देशों तथा अन्य कार्रवाइयों को भी कानूनी अधिकार के बिना घोषित करने की मांग की गई है। इसके अलावा मामले की जांच और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा जैसी राहतों की भी मांग सामने आई है।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 बार कुछ कदमों पर आपत्ति दर्ज की। चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई।
रिपोर्ट में मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर के संचालन से जुड़े सवालों का भी उल्लेख था। हालांकि, इन रिपोर्टों के जवाब में चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर निर्णय प्रक्रिया में किसी संस्थागत टूट की बात को खारिज किया और कहा कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
विशेष गहन पुनरीक्षण का सीधा संबंध मतदाता सूची से है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मतदाता सूची तैयार करने और उसमें नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े फैसले चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया से होने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के सामने अब इसी निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं।
चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। उनके साथ सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त के रूप में आयोग का हिस्सा हैं। ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।
आज की सुनवाई में क्या होगा?
5 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया, SIR से जुड़े फैसलों की वैधता और याचिकाओं में मांगी गई राहतें शामिल हैं। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अदालत CEC के खिलाफ कोई अंतिम आदेश देगी।
सुनवाई के दौरान अदालत याचिकाओं पर केंद्र, चुनाव आयोग या संबंधित पक्षों से जवाब मांग सकती है और मामले की आगे की सुनवाई के लिए दिशा तय कर सकती है। अंतिम राहत या आरोपों की वैधता पर निष्कर्ष अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
संपादकीय नोट: CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गए एकतरफा फैसलों के आरोप फिलहाल याचिकाकर्ताओं के दावे हैं। चुनाव आयोग ने SIR समेत अपने फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। इसलिए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।