अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीन ने अपने सैन्य हथियारों और बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। ऐसे में उसका मुकाबला करने के लिए पारंपरिक युद्ध तरीकों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष कमांडो और सीमा पर भूमिगत सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया।
अरुणाचल सीमा पर कई जगहों पर आमना-सामना
ITBP प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास भारत और चीन के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही हैं। कपूर ने बताया कि हाल के दिनों में राज्य की सीमा पर कई स्थानों पर आमना-सामना हुआ है और यह स्थिति जारी है।
द हिंदू की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तवांग नहीं, बल्कि तक्षिंग क्षेत्र के पास माजा इलाके में नियमित गश्त के दौरान भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से तक्षिंग के पास असाफिला क्षेत्र में गतिरोध जारी रहने की जानकारी भी दी गई है।
चीन का मुकाबला करने के लिए आधुनिक तकनीक पर जोर
कपूर ने कहा कि चीन के साथ लगने वाली सीमा भारत के लिए सबसे कठिन सीमाओं में से एक है। उनके मुताबिक, चीन की सैन्य क्षमता और हथियारों के आधुनिकीकरण को देखते हुए ITBP को भी अपनी तकनीकी और परिचालन क्षमता बढ़ानी होगी।
उन्होंने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। उनके अनुसार, ड्रोन ने युद्ध के तौर-तरीकों को बदल दिया है और अब केवल पारंपरिक सैन्य तरीकों के सहारे बड़ी सैन्य ताकत का मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है।
ITBP ने अपनी सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। इसके साथ ही ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और ड्रोन तकनीक को विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
शौर्य कमांडो और नए प्रशिक्षण की तैयारी
सीमा पर बदलती परिस्थितियों से निपटने के लिए ITBP ने शौर्य कमांडो की नई लड़ाकू टीम तैयार की है। कपूर ने बताया कि इन कमांडो ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ जारी आमना-सामना के दौरान अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
बल ने गलवान घाटी जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी तैयार किया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जवानों को कठिन परिस्थितियों में बेहतर तरीके से मुकाबला करने के लिए तैयार करना है। रिपोर्ट के अनुसार, ITBP के पूरे बल को 2027 के अंत तक इस प्रशिक्षण से गुजरना है।
योजना के तहत शौर्य कमांडो को सीमा सुरक्षा बटालियनों में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में लड़ाई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष पर्वतीय युद्ध क्षमता विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
ड्रोन और आधुनिकीकरण के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजना
ITBP प्रमुख ने बल के आधुनिकीकरण के लिए उपलब्ध कराए गए बजट का भी उल्लेख किया। द इकोनॉमिक टाइम्स की पीटीआई आधारित रिपोर्ट के अनुसार, बल को 400 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत राशि ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए निर्धारित की गई है।
इसके अलावा, गृह मंत्रालय ने लगभग 4,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। कपूर के अनुसार, इस योजना में से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों पर खर्च करने के लिए रखे जाएंगे।
बल अपने हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों को भी आधुनिक बनाने की तैयारी कर रहा है। कपूर ने बताया कि ITBP के कुछ हथियार लगभग 50 साल पुराने हैं, इसलिए उन्हें आधुनिक उपकरणों से बदलने की जरूरत है।
सीमा चौकियों पर भूमिगत सुरक्षा ढांचा बनाने की योजना
आधुनिक युद्ध में हवाई हमलों और ड्रोन से होने वाले खतरे को देखते हुए ITBP सीमा पर भूमिगत आश्रय स्थल बनाने पर भी काम कर रही है। कपूर के अनुसार, जमीन के ऊपर बनी इमारतें संघर्ष की स्थिति में निशाना बन सकती हैं, इसलिए जवानों की सुरक्षा के लिए भूमिगत ढांचा उपयोगी होगा।
इस संबंध में विभिन्न सीमा चौकियों पर शुरुआती परियोजनाएं शुरू की गई हैं। योजना के मुताबिक, अगले तीन वर्षों में सीमा चौकियों पर जमीन के ऊपर मौजूद ढांचे के समान संख्या में भूमिगत संरचनाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इन सुविधाओं में उचित वेंटिलेशन, जल निकासी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं शामिल करने की योजना है।
भारत-चीन सीमा पर आगे की स्थिति पर नजर
ITBP प्रमुख का बयान सीमा पर जारी तनाव और बल की तैयारियों के बारे में जानकारी देता है। फिलहाल, अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर सैनिकों के आमने-सामने होने की स्थिति को लेकर उनका बयान प्रमुख आधिकारिक जानकारी है। हालांकि, हर स्थान पर हुई घटनाओं का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सीमा पर तैनात बलों के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयास किस तरह आगे बढ़ते हैं। साथ ही, ITBP की आधुनिकीकरण योजनाओं, ड्रोन क्षमता और विशेष प्रशिक्षण को लागू करने की प्रगति पर भी नजर रहेगी।
संपादकीय सत्यापन नोट: ITBP प्रमुख के बयान और आधुनिकीकरण योजनाओं की जानकारी प्रकाशित समाचार रिपोर्टों से मिलती है। अरुणाचल प्रदेश में जारी आमना-सामना के प्रत्येक स्थान, घटनाओं की पूरी संख्या और चीन की ओर से इस विशेष बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं हो सकी है। इसलिए लेख में इन बिंदुओं पर अतिरिक्त दावे नहीं किए गए हैं।