भारत के सबसे बड़े परमाणु बिजलीघरों में शामिल तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी हजारों फाइलें जुलाई 2026 में ऑनलाइन डेटा लीक के मामले में सामने आईं। रॉयटर्स की 15 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक, रैनसमवेयर समूह वर्ल्ड लीक्स ने डार्क वेब पर संयंत्र से संबंधित करीब 19,000 फाइलें उपलब्ध कराई थीं। इस मामले ने परमाणु ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे और उससे जुड़े ठेकेदारों की साइबर सुरक्षा पर सवाल खड़े किए। हालांकि, परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) ने स्पष्ट किया कि सामने आई जानकारी परमाणु सुरक्षा या परमाणु संयंत्र के मुख्य सुरक्षा तंत्र से संबंधित नहीं थी।
कुडनकुलम से जुड़ी फाइलों में क्या था?
रॉयटर्स के अनुसार, लीक हुई फाइलों का कुल आकार लगभग 14.3 गीगाबाइट था। इनमें इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, आपूर्तिकर्ताओं की जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड, बैठकों के दस्तावेज और बीमा संबंधी कागजात शामिल होने का दावा किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दस्तावेजों का संबंध मुख्य रूप से संयंत्र की तीसरी और चौथी इकाई के निर्माण से जुड़ी सुविधाओं से था। इन इकाइयों के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को 2018 में निर्माण और बुनियादी ढांचे से संबंधित ठेका मिला था।
रिलायंस समूह ने रॉयटर्स को बताया था कि उसके एक सर्वर पर डेटा सुरक्षा में सेंध की आंशिक घटना हुई थी और सरकार को इसकी जानकारी दी गई थी। सर्वर भारतीय डेटा सेंटर सेवा प्रदाता योट्टा के यहां होस्ट किया गया था।
रॉयटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लीक हुई फाइलों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका था।
NPCIL ने परमाणु सुरक्षा से जुड़े दावे पर क्या कहा?
परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई गई जानकारी पारंपरिक सहायक सुविधाओं से संबंधित थी। निगम के मुताबिक, इनका संबंध परमाणु सुरक्षा या परमाणु सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील सिस्टम से नहीं था।
रिपोर्ट के अनुसार, योट्टा ने 29 मई 2026 को अपने एक सर्वर पर संदिग्ध गतिविधि देखी थी। कंपनी ने कहा कि उसने गतिविधि को रोक दिया और संदिग्ध रैनसमवेयर को चलने से रोकने में सफलता मिली। बाद में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने उसे बाहरी हमलावरों की ओर से डेटा लीक के दावों की जानकारी दी।
भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) इस मामले की जांच से जुड़ा था। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर जांच के अंतिम निष्कर्ष या पूरे घटनाक्रम की तकनीकी जानकारी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
2019 में भी सामने आया था साइबर सुरक्षा का मामला
कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का नाम इससे पहले अक्टूबर 2019 में भी साइबर सुरक्षा से जुड़े मामले में सामने आया था। उस समय संयंत्र के प्रशासनिक नेटवर्क से जुड़े एक कंप्यूटर में मैलवेयर पाए जाने की जानकारी सार्वजनिक हुई थी।
NPCIL ने 30 अक्टूबर 2019 को जारी स्पष्टीकरण में बताया था कि संक्रमित कंप्यूटर प्रशासनिक कामकाज के लिए इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा था। यह नेटवर्क संयंत्र के महत्वपूर्ण आंतरिक नियंत्रण नेटवर्क से अलग था। निगम के अनुसार, जांच में संयंत्र के सिस्टम प्रभावित होने के संकेत नहीं मिले थे।
इस मामले में मैलवेयर को बाद में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह से संबंधित बताया गया, हालांकि साइबर हमले की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुई।
इस तरह, 2019 की घटना और 2026 में सामने आए डेटा लीक के दावे कुडनकुलम से जुड़े दो अलग-अलग साइबर सुरक्षा घटनाक्रम हैं। दोनों को एक ही हमले या एक ही तकनीकी कमजोरी का नतीजा मानने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
कुडनकुलम में रूसी तकनीक की क्या भूमिका है?
कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित है। इसमें रूस के सहयोग से वीवीईआर डिजाइन वाले छह रिएक्टर विकसित किए जा रहे हैं। प्रत्येक इकाई की क्षमता 1,000 मेगावाट है।
NPCIL के अनुसार, पहली और दूसरी इकाई पहले से बिजली उत्पादन कर रही हैं, जबकि अन्य इकाइयों का निर्माण और विकास अलग-अलग चरणों में है। परियोजना में रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम की तकनीकी भूमिका है।
हालांकि, कुडनकुलम में विदेशी सॉफ्टवेयर हटाकर नई रूसी हार्डवेयर तकनीक लागू करने के दावे की इस खबर के लिए उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि नहीं हो सकी। इसलिए इसे संयंत्र में हाल में लिया गया निर्णय बताना उचित नहीं होगा।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी?
इस मामले में जांच के निष्कर्ष, प्रभावित सर्वर से संबंधित तकनीकी विवरण और लीक हुई फाइलों की प्रामाणिकता अहम बिंदु हैं। साथ ही, यह स्पष्ट होना जरूरी है कि डेटा तक अनधिकृत पहुंच किस तरह बनी और क्या किसी अतिरिक्त सिस्टम पर इसका असर पड़ा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर डेटा लीक के दावे और परमाणु संयंत्र के मुख्य नियंत्रण तंत्र पर वास्तविक प्रभाव के बीच अंतर करना जरूरी है। NPCIL ने मुख्य परमाणु सुरक्षा प्रणालियों के प्रभावित होने की बात से इनकार किया था। जांच से संबंधित आगे की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
संपादकीय सत्यापन नोट: डेटा लीक और 2019 के मैलवेयर मामले के बीच अंतर रखा गया है। फाइलों की प्रामाणिकता पर रॉयटर्स ने स्वतंत्र पुष्टि न होने की बात कही थी। सॉफ्टवेयर हटाने और नई रूसी हार्डवेयर तकनीक अपनाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।