प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने के मौके पर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा-सेवा ज्योति यात्रा’ कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, संघर्षों और उनसे मिली सीख का जिक्र किया। मोदी ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में कृतज्ञता का भाव आता है और जीवन में जिन लोगों तथा घटनाओं ने उन्हें आगे बढ़ना सिखाया, वे उनके लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी कोशिश सीखने की क्षमता को कभी कम न होने देने की रही है। उन्होंने कहा कि जितना सीखेंगे, उतना ही देश के लिए काम करने का सामर्थ्य बढ़ेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “जिसने मुझे जिताया उसने मुझे विनम्र होना सिखाया। जिसने मुझे गिराया, उसने मुझे फिर उठना सिखाया।”
25 साल पहले गुजरात से शुरू हुआ सफर
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने और तब से लगातार इस पद पर हैं। 7 अक्टूबर 2026 को गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक सरकार के प्रमुख के रूप में उनके 25 साल पूरे हुए।
इस मौके को भारतीय जनता पार्टी ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत देशभर में कार्यक्रमों के जरिए मनाया। 7 अक्टूबर को कई राज्यों में ‘सेवा ज्योति यात्रा’ और ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री का संबोधन वर्चुअल माध्यम से प्रसारित किया गया और लोगों को विकसित भारत-2047 के निर्माण का सामूहिक संकल्प दिलाया गया।
जीवन में क्या बनना है, इसे लक्ष्य नहीं बनाया
मोदी अपने सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग मौकों पर यह बात कह चुके हैं कि जीवन में केवल कुछ बनने का लक्ष्य रखने के बजाय कुछ करने पर ध्यान देना चाहिए। 2025 में उद्यमी निखिल कामथ के साथ बातचीत में भी उन्होंने राजनीति में आने वाले युवाओं के संदर्भ में कहा था कि उन्हें ‘मिशन’ लेकर आना चाहिए, केवल ‘एंबीशन’ लेकर नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि मिशन के साथ आगे बढ़ने पर व्यक्ति को कहीं न कहीं अपनी भूमिका मिलती जाती है और मिशन को महत्वाकांक्षा से ऊपर रखना चाहिए।
इसी तरह, लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में मोदी ने कहा था कि उन्होंने जीवन में ‘कुछ बनने’ के बजाय ‘कुछ करने’ का सपना देखने को अधिक महत्व दिया। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता, लेकिन लगातार कुछ करने की कोशिश करता रहता है, तो वह निराश होने के बजाय आगे बढ़ सकता है।
‘जिसने गिराया, उसने फिर उठना सिखाया’
7 अक्टूबर के संबोधन में मोदी ने अपने 25 साल के सफर को पीछे मुड़कर देखते हुए संघर्षों और चुनौतियों को सीख का हिस्सा बताया। उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम लिए बिना कहा कि उन्हें आगे बढ़ाने वाले लोगों और परिस्थितियों से भी उन्होंने सीखा और गिराने वाली परिस्थितियों से भी।
उनका संदेश यह था कि सफलता से विनम्रता और मुश्किलों से दोबारा खड़े होने की क्षमता मिलनी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया लगातार जारी रहनी चाहिए।
‘हम करके रहेंगे’ को बताया अमृत भाव
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में “We Will Do It” यानी “हम करके रहेंगे” की भावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे उस मानसिकता से जोड़ा, जिसमें व्यक्ति किसी काम को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करता है।
25 साल पूरे होने का यह अवसर ऐसे समय आया है जब भाजपा ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन की इस यात्रा को ‘सेवा’ और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ते हुए देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए हैं। पार्टी ने सितंबर में शुरू किए गए ‘सेवा संकल्प अभियान’ को 17 अक्टूबर तक चलाने की घोषणा की थी।
25 साल की यात्रा में गुजरात से दिल्ली तक
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के इस दौर की शुरुआत गुजरात से हुई थी। 7 अक्टूबर 2001 को मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2002 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक बने। इसके बाद गुजरात में लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद 2014 में उन्होंने केंद्र की राजनीति में प्रवेश किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस पूरी यात्रा में पद से ज्यादा दायित्व महत्वपूर्ण रहा। लेक्स फ्रिडमैन के साथ बातचीत में उन्होंने खुद को ‘प्रधान सेवक’ के रूप में देखने की बात कही थी और कहा था कि उनका उद्देश्य सत्ता की राजनीति करना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक योगदान देना रहा है।
7 अक्टूबर के कार्यक्रम में उनके भाषण का केंद्र भी इसी तरह की सीख और सेवा की भावना रही। 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रमों में अब आगे का जोर ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प पर है। विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए इस संकल्प को लोगों तक पहुंचाने और सेवा ज्योति यात्राओं के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
फैक्ट-चेक नोट: “मिशन, एंबीशन” और “कुछ बनने के बजाय कुछ करने” वाली टिप्पणियां प्रधानमंत्री के पुराने आधिकारिक रूप से प्रकाशित संवादों से हैं; इन्हें 7 अक्टूबर 2026 के भाषण का प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं बनाया गया है। 7 अक्टूबर के संबोधन से प्रत्यक्ष उद्धरण के रूप में केवल उपलब्ध रिपोर्ट में दर्ज “जिसने मुझे जिताया…” और “जिसने मुझे गिराया…” वाली पंक्तियां इस्तेमाल की गई हैं।