नई दिल्ली, 7 अक्टूबर। दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA ब्लॉक के कुछ अन्य नेताओं के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में FIR दर्ज की है। यह कार्रवाई 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के बाद की गई है। आकाशवाणी भवन में राहुल और प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं ने करीब आठ घंटे तक धरना दिया था। देर शाम पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
अब कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों की दोपहर 1 बजे बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात का समय मांगने वाले पत्र पर सांसदों के हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
आकाशवाणी भवन में कैसे पहुंचा विरोध प्रदर्शन
6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे थे। विपक्षी दलों का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर था।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग कार्यालय से कुछ दूरी पहले बैरिकेड लगाकर रोक दिया। इसके बाद कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां धरने पर बैठ गए।
रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस के कुछ अन्य नेता भी परिसर में मौजूद रहे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने को कहा, लेकिन धरना जारी रहा।
करीब आठ घंटे चला धरना
आकाशवाणी भवन में धरना दोपहर के बाद शुरू हुआ और शाम तक जारी रहा। राहुल गांधी और अन्य नेताओं की मांग थी कि विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग से मिलने का मौका दिया जाए।
करीब आठ घंटे बाद रात में दिल्ली पुलिस ने परिसर खाली कराने की कार्रवाई की। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेकर पुलिस बसों से ले जाया गया। PTI के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आकाशवाणी भवन परिसर से हटाया और हिरासत में लिए गए नेताओं को बाद में छोड़ा गया।
आकाशवाणी भवन में प्रवेश को लेकर FIR
दिल्ली पुलिस को आकाशवाणी की ओर से शिकायत मिलने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान नेता बिना अनुमति आकाशवाणी भवन परिसर में दाखिल हुए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में दर्ज आरोप अभी जांच का विषय हैं। FIR दर्ज होना किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी चिंताएं और ज्ञापन सौंपना चाहते थे। वहीं चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर की घटनाओं के बाद कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से आयोग से मुलाकात के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया गया था।
आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस के जरिए उसे जानकारी मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में लगभग 240 सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं और संसद भवन एनेक्सी में ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। आयोग ने इस प्रस्तावित स्थान और तरीके को अपने स्थापित प्रोटोकॉल के लिहाज से असामान्य बताया। आयोग ने यह भी कहा कि उसके वरिष्ठ अधिकारी को ज्ञापन लेने के लिए भेजने का विकल्प दिया गया था, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इसे स्वीकार नहीं किया।
अब खड़गे ने बुलाई विपक्षी सांसदों की बैठक
6 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 7 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों को लंच बैठक के लिए बुलाया है। यह बैठक दोपहर 1 बजे दिल्ली में प्रस्तावित है।
रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में विपक्षी सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के लिए समय मांगने वाले पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। इसके जरिए विपक्ष अपनी शिकायतों और SIR से जुड़े मुद्दों को चुनाव आयोग के सामने रखने की कोशिश करेगा।
विपक्षी दल SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों पर अपना पक्ष पहले ही रख चुका है और आयोग की ओर से कहा गया है कि वह अपने स्थापित नियमों और प्रक्रिया के तहत काम कर रहा है।
आगे क्या?
अब निगाहें खड़गे की बैठक और विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग को भेजे जाने वाले पत्र पर हैं। वहीं आकाशवाणी भवन में कथित अनधिकृत प्रवेश को लेकर दर्ज FIR की जांच भी आगे बढ़ेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में दो अलग-अलग मुद्दे सामने हैं—एक ओर चुनाव आयोग से मुलाकात और SIR को लेकर विपक्ष की राजनीतिक मांगें हैं, जबकि दूसरी ओर आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश को लेकर दर्ज पुलिस मामला है। दोनों मामलों की आगे की कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर होगी।
फैक्ट-चेक नोट: उपलब्ध रिपोर्टों में धरने की अवधि को अलग-अलग जगह “आठ घंटे”, “आठ घंटे से अधिक” और कुछ रिपोर्टों में करीब नौ घंटे बताया गया है। इसलिए लेख में इसे करीब आठ घंटे के रूप में रखा गया है। FIR में लगाए गए आरोपों को अंतिम अपराध या दोषसिद्धि के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।