दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विपक्षी INDIA गठबंधन के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे की नाराजगी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी के बीच विपक्षी सांसद शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की तैयारी में हैं। हालांकि, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां बताई जा रही हैं।
राष्ट्रपति भवन मार्च से पहले क्यों बढ़ी INDIA गठबंधन की मुश्किलें?
INDIA गठबंधन के नेता पिछले तीन दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें। यह विरोध मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और कथित वोट चोरी से जुड़े आरोपों को लेकर है।
6 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था। इसके बाद 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 8 अक्टूबर को राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
अब 9 अक्टूबर को संसद परिसर से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की योजना है। विपक्षी दल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर चुनाव आयोग से जुड़े अपने आरोपों और मांगों को उनके सामने रखना चाहते हैं।
उद्धव ठाकरे कांग्रेस से क्यों नाराज बताए जा रहे हैं?
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की नाराजगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। एनडीटीवी इंडिया की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ठाकरे कांग्रेस की कथित एकतरफा कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उद्धव ठाकरे गुट का कोई सांसद शुक्रवार के प्रदर्शन में शामिल नहीं होगा और न ही राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में उसकी भागीदारी होगी।
हालांकि, इस नाराजगी पर उद्धव ठाकरे का कोई प्रत्यक्ष, विस्तृत सार्वजनिक बयान उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है। इसलिए इसे उनके गुट और कांग्रेस के बीच औपचारिक टकराव या गठबंधन टूटने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
इससे पहले 4 अक्टूबर को उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च किया था। दोनों नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए थे।
अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी क्यों नहीं दिख रहे साथ?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी ने भी विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं। 7 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन के नेताओं की दोपहर के भोजन वाली बैठक में समाजवादी पार्टी शामिल नहीं हुई थी।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं ने कांग्रेस की ओर से विपक्षी मार्च के दौरान समन्वय और नेतृत्व के तरीके को लेकर असंतोष जताया था। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से कहा गया कि बैठक का फैसला देर से हुआ और सूचना पहुंचने में देरी हुई। इस घटनाक्रम ने दोनों दलों के बीच तालमेल को लेकर चर्चाओं को हवा दी।
अखिलेश यादव 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग की ओर मार्च कर रहे विपक्षी सांसदों के साथ मौजूद थे। बाद में दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया था। इसके बाद उनके लखनऊ लौटने की खबर आई। ऐसे में 9 अक्टूबर के प्रदर्शन में उनकी अनुपस्थिति को केवल कांग्रेस से नाराजगी का नतीजा बताने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
राष्ट्रपति से मुलाकात पर भी टिकी नजर
विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने के लिए समय मांगा है। द इंडियन एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके बाद राष्ट्रपति भवन कार्यालय ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं के नाम मांगे, जिन्हें 5 अक्टूबर को भेजा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी दलों को उस समय तक मुलाकात के लिए औपचारिक मंजूरी मिलने की जानकारी नहीं थी। गठबंधन की योजना है कि अनुमति मिलने पर प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात करे। यदि अनुमति नहीं मिलती है, तो विपक्षी सांसद राष्ट्रपति भवन तक मार्च करके विरोध दर्ज कराने पर विचार कर रहे हैं।
इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी 8 अक्टूबर को राजघाट पर हुए प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकीं। जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता हवाई अड्डे पर बम की धमकी के कारण उनकी उड़ान में देरी हुई थी। उनके 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति से मिलने जाने की खबर भी सामने आई है।
क्या INDIA गठबंधन में बढ़ रहे हैं मतभेद?
हालिया घटनाक्रम से स्पष्ट है कि विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर कांग्रेस चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त विरोध प्रदर्शन को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ सहयोगी दलों की गैरमौजूदगी और बैठक में भागीदारी को लेकर विवाद सामने आए हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि INDIA गठबंधन में टूट की स्थिति बन गई है। राष्ट्रपति भवन मार्च में कौन-कौन से दल शामिल होते हैं, क्या राष्ट्रपति से मुलाकात की अनुमति मिलती है और कांग्रेस अपने सहयोगियों के साथ तालमेल कैसे बनाती है—इन घटनाक्रमों से गठबंधन की आगे की रणनीति को समझने में मदद मिलेगी।
संपादकीय सत्यापन नोट: प्रदर्शन की योजना और नेताओं की गैरमौजूदगी से संबंधित विवरण 9 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं। उद्धव ठाकरे की नाराजगी को रिपोर्टों में सामने आए दावे के रूप में प्रस्तुत किया गया है; उनके प्रत्यक्ष बयान से इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। राष्ट्रपति भवन से मुलाकात की अंतिम मंजूरी और मार्च में शामिल होने वाले सभी दलों की स्थिति की अलग से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।