प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर 2026 को कनाडा का दौरा करेंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यालय और कनाडा में भारतीय उच्चायोग की ओर से इसकी पुष्टि की गई है। दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को जल्द पूरा करने और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर प्रमुखता से बातचीत होने की उम्मीद है।
13 अक्टूबर को पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा संबंधों में आई सकारात्मक गति को आगे बढ़ाने और CEPA वार्ता को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य का भी समर्थन किया है।
दिसंबर में कनाडा जाएंगे पीएम मोदी
कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोदी और कार्नी दिसंबर में होने वाली मुलाकात से पहले संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं। इसके एक दिन बाद, 15 अक्टूबर को कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने भी नई दिल्ली में पीएम मोदी से मुलाकात की। कनाडाई सरकार के अनुसार, इस बैठक में ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने साल के अंत तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता पूरा करने के महत्व पर भी जोर दिया।
CEPA पर चल रही है बातचीत
भारत और कनाडा के बीच CEPA को लेकर बातचीत 2026 में तेज हुई है। सितंबर में कनाडा सरकार ने बताया था कि समझौते पर चार दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और दोनों पक्ष साल के अंत तक वार्ता पूरी करने के साझा लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
कनाडा के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार करीब 13.6 अरब कनाडाई डॉलर रहा। वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर यह आंकड़ा 30.4 अरब कनाडाई डॉलर था। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
कनाडा से भारत को होने वाले प्रमुख निर्यात में सब्जियां, खनिज ईंधन और तेल तथा लकड़ी का गूदा शामिल हैं। वहीं भारत से कनाडा जाने वाले प्रमुख उत्पादों में कीमती पत्थर और धातुएं, मशीनरी तथा फार्मास्युटिकल उत्पाद शामिल हैं।
अमेरिका के साथ व्यापार तनाव के बीच कनाडा तलाश रहा नए बाजार
मोदी का कनाडा दौरा ऐसे समय हो रहा है जब कनाडा अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ को लेकर दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की ओर से कनाडाई उत्पादों पर टैरिफ लगाए जाने और व्यापार शर्तों में बदलाव के बीच कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिकी बाजार पर कम निर्भर बनाने की कोशिश कर रहा है।
अगस्त में कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा था कि अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों में बदलाव के बीच कनाडा घरेलू आर्थिक क्षमता मजबूत करने और विदेशों में अपने व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाने पर ध्यान दे रहा है। कनाडा सरकार ने गैर-अमेरिकी बाजारों में निर्यात बढ़ाने को अपनी आर्थिक रणनीति का हिस्सा बताया है।
रॉयटर्स के मुताबिक, कनाडा भारत के साथ व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के साथ यूरोपीय संघ, चीन और आसियान देशों के साथ भी व्यापार संबंध बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करना और गैर-अमेरिकी बाजारों में कनाडाई व्यापार का विस्तार करना है।
भारत के लिए भी व्यापार समझौता अहम
भारत और कनाडा ने 2025 में CEPA के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमति बनाई थी। मार्च 2026 में कार्नी की भारत यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने समझौते को इसी साल पूरा करने और अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोहराया था।
भारत और कनाडा के बीच व्यापार के अलावा ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक, रक्षा, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है। जून में दोनों नेताओं ने CEPA वार्ता में हुई प्रगति पर संतोष जताया था और 2026 में समझौता पूरा करने का साझा लक्ष्य दोहराया था।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पीएम मोदी की दिसंबर यात्रा के दौरान CEPA पर अंतिम हस्ताक्षर होंगे या केवल बातचीत को अंतिम चरण तक पहुंचाने पर सहमति बनेगी। आधिकारिक तौर पर दोनों देशों ने अभी समझौते को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई है।