दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर राजधानी के सभी 15 पुलिस जिलों में preventive action किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों और प्रदर्शन में भीड़ जुटाने की आशंका वाले कुछ लोगों पर कार्रवाई की। शुरुआती रिपोर्टों में 30 से 40 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई थी, जबकि बाद की PTI रिपोर्ट में 15 जिलों में 600 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग है और पुलिस की ओर से कुल हिरासत की विस्तृत आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
15 जिलों में पुलिस की कार्रवाई
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने राजधानी के सभी 15 पुलिस जिलों में निगरानी और जांच बढ़ाई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। इसके अलावा ऐसे लोगों की गतिविधियों पर भी नजर रखी गई, जिनके बारे में आशंका थी कि वे प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटा सकते हैं। कुछ संदिग्ध लोगों के घरों के बाहर भी निगरानी बढ़ाई गई।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की यह कार्रवाई लगातार दो दिनों तक चली। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ लोगों को हिरासत में लेने के साथ कुछ लोगों को उनके घरों में ही नजरबंद रखा गया और कुछ को पुलिस ने बुलाकर काउंसलिंग की। हालांकि, कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए और केवल एहतियातन हिरासत में लिए गए लोगों की अलग-अलग संख्या उपलब्ध नहीं है।
20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े लोगों पर भी नजर
पुलिस की मौजूदा कार्रवाई का एक हिस्सा 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन के दौरान पहचान किए गए लोगों से भी जुड़ा बताया गया है। आजतक के मुताबिक, उस प्रदर्शन के दौरान FRS सिस्टम के जरिये पहचाने गए आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों में से भी कई लोगों को बाद में पकड़ा गया। हालांकि, इस दावे के संदर्भ में दिल्ली पुलिस की ओर से कुल संख्या का विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका वाले कुछ लोगों को कथित तौर पर बुलाकर कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित परिणामों के बारे में समझाया। रिपोर्ट के अनुसार, काउंसलिंग के बाद कुछ लोगों को छोड़ दिया गया।
600 से ज्यादा लोगों की हिरासत की रिपोर्ट
10 अक्टूबर की सुबह सामने आई PTI रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया कि दिल्ली के सभी 15 जिलों में 600 से अधिक आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को preventive action के तहत हिरासत में लिया गया। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना था।
यह आंकड़ा शुरुआती PTI रिपोर्ट में बताए गए 30-40 लोगों से काफी अधिक है। इसलिए इसे एक ही संख्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि पुलिस ने 15 जिलों में बड़े स्तर पर preventive action किया, लेकिन अलग-अलग समय पर जारी रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन को अनुमति नहीं
CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जानी थी। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, आवेदन निर्धारित समय से कम समय पहले दिया गया था और सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं भी थीं।
पुलिस ने नई दिल्ली इलाके में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू होने की जानकारी भी दी है और लोगों से इनका पालन करने की अपील की है। प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के बावजूद CJP की ओर से कार्यक्रम आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।
दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस ने कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था की है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने नई दिल्ली जिले में कई blocking points बनाए हैं और सभी 15 जिलों में अलग-अलग detention centres की व्यवस्था की है।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। 10 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई।
पुलिस की कार्रवाई का आधार
पुलिस की ओर से बताए गए preventive action का मुख्य उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करना है। पुलिस उन लोगों पर विशेष नजर रख रही है, जिनके बारे में उसे आशंका है कि वे बड़ी संख्या में लोगों को प्रदर्शन के लिए जुटा सकते हैं या भीड़ को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि 15 जिलों में कार्रवाई के दौरान कुल कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया और कितने लोगों को केवल एहतियातन हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया गया। इसलिए उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर गिरफ्तारी और preventive detention को एक ही श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।
नोट: उपलब्ध स्रोतों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अंतर है। इसलिए लेख में 30-40 और 600+ दोनों आंकड़ों को उनके संबंधित स्रोत और संदर्भ के साथ अलग-अलग रखा गया है। कुल गिरफ्तारियों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी।