दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस के दो जवानों ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों को हटाने और हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान उन्हें पीछे से खींचकर जमीन पर गिराया गया और लात मारी गई। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर आरोप लगाने वाले जवानों के बयानों को स्वतंत्र रूप से पूरी तरह सत्यापित नहीं किया जा सका है।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह मामला 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान सामने आया। INDIA ब्लॉक के नेता चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध जता रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की होने की बात सामने आई है।
पुलिसकर्मियों के मुताबिक, वे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और उन्हें पुलिस बसों तक ले जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर उन्हें पीछे से खींचा, जिससे वे भीड़ के बीच गिर गए।
दो जवानों ने सुनाई आपबीती
आजतक की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों की पहचान भूपेंद्र और देवेंद्र के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जवानों ने आरोप लगाया कि हिरासत में लेने की कार्रवाई के दौरान उन्हें पीछे से खींचकर गिराया गया। एक जवान ने बताया कि गिरने के दौरान उसका बॉडी-वॉर्न कैमरा भी जमीन पर गिर गया। कैमरा उठाकर खड़े होने के बाद उसे पीछे से लात मारे जाने का आरोप भी लगाया गया।
पुलिसकर्मियों का यह भी कहना है कि भीड़ में कुछ लोग उनकी कैप उतारकर फेंक रहे थे और उनके साथ धक्का-मुक्की कर रहे थे। इन आरोपों के संबंध में किस व्यक्ति ने हमला किया, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
चुनाव आयोग के खिलाफ क्यों हो रहा है प्रदर्शन?
INDIA ब्लॉक के नेता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।
इस राजनीतिक विरोध के बीच पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट के आरोपों को विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के व्यापक राजनीतिक मुद्दे से अलग रखकर जांचना जरूरी है।
मामले में पुलिस की कार्रवाई
मनीकंट्रोल की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित हमले, ड्यूटी में बाधा और संबंधित घटनाओं को लेकर तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने घटना से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की बात कही।
हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के अदालत में साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी होगा।
फिलहाल, पुलिसकर्मियों के बयान और घटना से जुड़े वीडियो इस मामले के प्रमुख पहलू हैं। आगे की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कथित मारपीट में कौन लोग शामिल थे और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
संपादकीय सत्यापन नोट: घटना की तारीख और पुलिसकर्मियों के आरोपों के लिए प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों का मिलान किया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि, सभी संबंधित पक्षों का जवाब और प्राथमिकी के बाद की पूरी कानूनी स्थिति उपलब्ध सामग्री से स्थापित नहीं हो सकी है। प्रकाशन से पहले दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष और संबंधित प्राथमिकी की स्थिति जांचना उचित होगा।