अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल जमीनी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। 24 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग सर्कल में आने वाले असफिला और लोंगजू इलाके संवेदनशील बने हुए हैं। दोनों देशों के सैनिकों की गश्त के दौरान समय-समय पर आमना-सामना होता है, लेकिन फिलहाल किसी हिंसक झड़प की रिपोर्ट नहीं है।
मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बनी हुई है क्योंकि इन इलाकों में भारत और चीन की Line of Actual Control (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। ऐसे क्षेत्रों में दोनों तरफ की गश्ती गतिविधियों के दौरान फेसऑफ की स्थिति पैदा हो सकती है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय कमांडर संयम बरत रहे हैं और स्थिति पर परिचालन नियंत्रण बना हुआ है।
टक्सिंग क्षेत्र में क्या हो रहा है?
टक्सिंग क्षेत्र में हाल के महीनों में भारत और चीन की गश्ती गतिविधियों को लेकर तनाव की खबरें सामने आई थीं। 23 अक्टूबर को ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने भी अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच फेसऑफ जारी रहने की बात कही थी। कपूर ने हालांकि इन स्थानों के नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताए थे।
इसके एक दिन बाद सामने आई रक्षा सूत्रों की जानकारी में असफिला और लोंगजू को उन संवेदनशील क्षेत्रों के तौर पर बताया गया, जहां गश्ती दलों के बीच समय-समय पर आमना-सामना होता है। साथ ही यह भी कहा गया कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच किसी हिंसक टकराव की रिपोर्ट नहीं है।
फेसऑफ को कैसे संभाला जा रहा है?
स्थानीय स्तर पर ऐसी स्थितियों को संभालने के लिए दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद सैन्य संवाद तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, फ्लैग मीटिंग और हॉटलाइन संचार जैसे माध्यमों से स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने भी 23 अक्टूबर को कहा कि भारत और चीन सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने तथा LAC पर गलतफहमी और गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्रों का इस्तेमाल जारी रखे हुए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा क्षेत्रों की स्थिति समय-समय पर तब प्रभावित होती है जब चीनी सेना स्थापित गश्ती पैटर्न से अलग गतिविधि करती है।
सितंबर में हुई थी अहम सैन्य बातचीत
अरुणाचल में मौजूदा तनाव के बीच भारत और चीन के बीच सितंबर में पूर्वी सेक्टर में पहली बार वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग हुई थी।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक 6 सितंबर को भारत की ओर वाचा और 7 सितंबर को चीन की ओर दमाई में हुई। यह बातचीत अरुणाचल सेक्टर में LAC से जुड़े मुद्दों और सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा थी। भारतीय पक्ष का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया था।
यह बैठक उस समय हुई थी जब टक्सिंग क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव की खबरें सामने आ रही थीं। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले मतभेदों को सैन्य संवाद के माध्यम से संभालने के लिए तंत्र को मजबूत करने की कोशिश हुई|
तनाव है, लेकिन तत्काल टकराव के संकेत नहीं
मौजूदा तस्वीर में दो बातें साथ-साथ दिखाई देती हैं। एक ओर असफिला और लोंगजू जैसे इलाकों में LAC की अलग-अलग धारणाओं के कारण संवेदनशीलता बनी हुई है और गश्त के दौरान फेसऑफ हो रहे हैं। दूसरी ओर, उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हुई है और किसी हिंसक सैन्य झड़प की पुष्टि नहीं हुई है।
भारत और चीन के बीच सैन्य और कूटनीतिक बातचीत के चैनल भी सक्रिय हैं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी है।
फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि अरुणाचल के LAC सेक्टर में तनाव खत्म नहीं हुआ है, लेकिन स्थानीय स्तर पर स्थिति नियंत्रण में है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों देशों की गश्ती गतिविधियों और LAC को लेकर अलग-अलग धारणाओं से पैदा होने वाले फेसऑफ को किस तरह सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से संभाला जाता है।