नई दिल्ली: पैकेज्ड फूड पर फ्रंट-ऑफ-पैक (Front-of-Pack) न्यूट्रिशन वॉर्निंग लेबल लागू करने को लेकर Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के नए प्रस्ताव पर सवाल उठने लगे हैं। FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हालिया अनुपालन हलफनामे में रेड हेक्सागन वॉर्निंग लेबल लागू करने का प्रस्ताव रखा है और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को नए लेबलिंग नियमों का पालन करने के लिए 365 दिनों का समय देने की बात कही है।
FSSAI के मुताबिक, यह समय कंपनियों को पहले से छपी पैकेजिंग सामग्री के इस्तेमाल और बदलाव की प्रक्रिया के लिए दिया जाना है, ताकि मौजूदा पैकेजिंग स्टॉक के कारण कारोबारी नुकसान या अन्य व्यावसायिक कठिनाइयों से बचा जा सके।
हालांकि, Nutrition Advocacy in Public Interest (NAPi) ने इस समय-सीमा और प्रस्तावित प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल की व्यवस्था पहले से चल रही नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे लागू करने में नई देरी नहीं होनी चाहिए।
FSSAI ने क्या प्रस्ताव दिया है?
23 सितंबर 2026 के आसपास सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए FSSAI के प्रस्ताव में फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग के लिए रेड हेक्सागन और सफेद बैकग्राउंड वाले डिजाइन का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, पैकेज्ड फूड में तय सीमा से अधिक संबंधित पोषक तत्व पाए जाने पर सामने की तरफ चेतावनी दी जा सकती है। इसमें मुख्य रूप से अतिरिक्त शुगर, फैट और नमक से जुड़े संकेत शामिल हैं। एक से अधिक पोषक तत्व निर्धारित सीमा से ऊपर होने पर उन्हें एक ही हेक्सागन के भीतर दर्शाने का प्रस्ताव है।
FSSAI ने यह भी कहा है कि नए नियमों के ड्राफ्ट को तैयार और अंतिम रूप देने में करीब चार महीने लग सकते हैं। इसके बाद फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लिए 365 दिनों की स्वैच्छिक अनुपालन अवधि प्रस्तावित की गई है।
एक साल का समय क्यों देना चाहती है FSSAI?
FSSAI का तर्क मुख्य रूप से पैकेजिंग सामग्री से जुड़ा है। खाद्य कंपनियां बड़ी मात्रा में पैकेज पहले से प्रिंट कराती हैं। यदि लेबलिंग नियम तुरंत बदल दिए जाते हैं, तो पहले से छपी पैकेजिंग का इस्तेमाल मुश्किल हो सकता है और कंपनियों को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 365 दिनों की अवधि का उद्देश्य ऐसे व्यावसायिक नुकसान से बचना है। नियामक ने अपनी नीति का संदर्भ देते हुए यह भी बताया कि लेबलिंग से जुड़े बदलावों के लिए न्यूनतम 365 दिनों की संक्रमण अवधि का प्रावधान अपनाया गया है।
इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित नियम को मंजूरी मिलने के बाद भी नए चेतावनी लेबल हर पैकेज पर तुरंत दिखाई देने की बजाय कंपनियों को बदलाव के लिए एक संक्रमण अवधि मिल सकती है।
NAPi ने क्यों जताई आपत्ति?
Nutrition Advocacy in Public Interest (NAPi) ने FSSAI के नए प्रस्ताव में कुछ बदलावों का स्वागत किया है, लेकिन संगठन ने प्रक्रिया में संभावित देरी पर चिंता जताई है।
25 सितंबर को सामने आए NAPi के बयान के मुताबिक, संगठन का कहना है कि FSSAI की ओर से दो-चरणीय व्यवस्था और पहले प्रस्तावित ‘दो या अधिक पोषक तत्व’ वाली शर्त को हटाना सकारात्मक बदलाव है। लेकिन संगठन ने नए सिरे से सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित करने और अनुपालन के लिए लंबी समय-सीमा को लेकर सवाल उठाए हैं।
NAPi का तर्क है कि फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग पर काम सितंबर 2022 से चल रहा है। ऐसे में संगठन चाहता है कि नियामकीय प्रक्रिया को फिर से शुरू करने के बजाय उपलब्ध ड्राफ्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर इसे समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
संगठन ने यह भी कहा है कि चेतावनी लेबल का उद्देश्य तभी प्रभावी ढंग से पूरा होगा जब उसे स्पष्ट, प्रमुख और उपभोक्ता को आसानी से समझ आने वाले तरीके से पैकेज के सामने लगाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला
फूड वॉर्निंग लेबल का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में 3S and Our Health Society की याचिका से जुड़ा हुआ है। मामले में पैकेज्ड फूड पर अधिक शुगर, नमक और फैट जैसे पोषक तत्वों के बारे में फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी की मांग की गई है।
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI की प्रगति पर असंतोष जताते हुए मामले में आगे कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद अगस्त में अदालत ने फ्रंट-ऑफ-पैक लेबल के दृश्य प्रारूप को लेकर सरकार से विशेषज्ञों के साथ विचार करने को कहा।
10 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से प्रस्तावित व्यवस्था की समय-सीमा और दूसरे चरण से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। इसके बाद FSSAI ने सितंबर में अपना नया अनुपालन हलफनामा दाखिल किया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को सूचीबद्ध है।
अब आगे क्या होगा?
FSSAI के प्रस्ताव पर अंतिम नियम अभी लागू नहीं हुए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था को नियामकीय प्रक्रिया और आवश्यक मंजूरियों से गुजरना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अंतिम लेबल का आकार, भाषा, पोषक तत्वों की सीमा, अनुपालन अवधि और अन्य शर्तें क्या होंगी।
फिलहाल विवाद का एक प्रमुख बिंदु यही है कि उपभोक्ताओं को पैकेज्ड फूड के बारे में चेतावनी कितनी जल्दी और किस प्रारूप में उपलब्ध कराई जाए। एक तरफ FSSAI कंपनियों को मौजूदा पैकेजिंग स्टॉक से होने वाली व्यावसायिक कठिनाइयों से बचाने के लिए समय देने की बात कर रहा है, वहीं NAPi जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाएं प्रक्रिया में अतिरिक्त देरी से बचने की मांग कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में FSSAI के प्रस्ताव और उसके कार्यान्वयन की समय-सीमा पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
Verification Note: 26 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर 365 दिन की अवधि FSSAI का प्रस्ताव है; इसे अंतिम लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए। अंतिम व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और आगे की नियामकीय प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
यह ड्राफ्ट 26 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है और इसमें प्रस्ताव, NGO की आपत्ति तथा अंतिम नियम के बीच स्पष्ट अंतर रखा गया है।