भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक, लॉजिस्टिक्स और सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ समुद्री सुरक्षा भी साझेदारी का अहम हिस्सा बन रही है। 2025 में दोनों देशों ने अगले दस साल के लिए नया Defense Framework अपनाया था, जिसमें maritime security और Maritime Domain Awareness को स्पष्ट प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है।
हालांकि, 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई नया अमेरिकी ऐलान नहीं मिला है जिसमें हाल के दिनों में भारत के साथ किसी नए बड़े समुद्री रक्षा समझौते की घोषणा की गई हो। इसलिए मौजूदा स्थिति को किसी नई डील के बजाय पहले से तय सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में देखना अधिक सटीक होगा।
नए डिफेंस फ्रेमवर्क में समुद्री सहयोग को जगह
31 अक्टूबर 2025 को अमेरिका और भारत ने नया U.S.-India Major Defense Partnership Framework साइन किया था। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, यह फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को अगले दस वर्षों के लिए दिशा देता है।
इसमें जमीन, समुद्र, हवा, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्र में interoperability बढ़ाने की बात कही गई है। समुद्री सुरक्षा और Maritime Domain Awareness यानी समुद्री गतिविधियों की निगरानी और उससे जुड़ी जानकारी साझा करना भी इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
फ्रेमवर्क में दोनों देशों की सेनाओं के बीच operational coordination बढ़ाने, सैन्य अभ्यासों का दायरा और जटिलता बढ़ाने, logistics cooperation मजबूत करने तथा प्रशिक्षण और सैन्य शिक्षा में सहयोग बढ़ाने की बात भी कही गई है।
समुद्र में किस तरह बढ़ सकता है सहयोग?
भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग कोई नया क्षेत्र नहीं है। दोनों देशों की नौसेनाएं लंबे समय से संयुक्त अभ्यास और maritime information sharing से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं।
Maritime Domain Awareness में समुद्र में जहाजों की आवाजाही, संदिग्ध गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटाना और साझा करना शामिल है। हिंद महासागर और व्यापक Indo-Pacific क्षेत्र में समुद्री यातायात और रणनीतिक समुद्री मार्गों को देखते हुए यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए अहम है।
2025 में अमेरिका ने भारत के लिए Indo-Pacific Maritime Domain Awareness से जुड़ी एक संभावित Foreign Military Sale को मंजूरी दी थी। अमेरिकी Defense Security Cooperation Agency के मुताबिक, प्रस्तावित पैकेज की अनुमानित कीमत 131 मिलियन डॉलर थी और इसमें SeaVision software, training तथा analytical support जैसी क्षमताएं शामिल थीं।
2026 में भी जारी है सैन्य सहयोग
भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की सक्रियता 2026 में भी दिखाई दे रही है। सितंबर में दोनों देशों की सेनाओं ने Yudh Abhyas 2026 का 22वां संस्करण आयोजित किया। यह अभ्यास 15 सितंबर को उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में शुरू हुआ था।
भारत के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, दोनों पक्षों के करीब 600-600 सैन्यकर्मी इसमें शामिल हुए। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच interoperability, संयुक्त planning और विभिन्न परिस्थितियों में coordinated operations की क्षमता बढ़ाना था।
इस अभ्यास में drones, autonomous systems, surveillance और reconnaissance जैसी तकनीकों पर भी प्रशिक्षण और आदान-प्रदान हुआ। हालांकि Yudh Abhyas मुख्य रूप से थल सेना का अभ्यास है, लेकिन यह दोनों देशों के व्यापक सैन्य सहयोग की निरंतरता को दिखाता है।
नौसेना सहयोग पहले से कई स्तरों पर मौजूद
भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच सहयोग में Malabar जैसे बहुपक्षीय अभ्यास, maritime information sharing और operational exchanges शामिल रहे हैं। दोनों देशों के आधिकारिक दस्तावेजों में underwater domain awareness और समुद्री क्षेत्र में बेहतर coordination की जरूरत भी पहले दर्ज की जा चुकी है।
भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर क्षेत्र में उसे विशेष भूमिका देती है। अमेरिका के लिए भी Indo-Pacific में समुद्री सुरक्षा, समुद्री मार्गों की निगरानी और साझेदार देशों के साथ interoperability महत्वपूर्ण विषय हैं।
इसी वजह से आने वाले समय में समुद्री निगरानी, information sharing, logistics, संयुक्त प्रशिक्षण और unmanned maritime technologies जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि किसी खास नई परियोजना या समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है, ऐसा दावा मौजूदा सत्यापित रिकॉर्ड के आधार पर नहीं किया जा सकता।
रक्षा सहयोग का दायरा केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं
भारत-अमेरिका रक्षा संबंध पिछले वर्षों में केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं रहे हैं। दोनों देशों ने logistics, secure communications, geospatial information, defense technology और industrial cooperation के लिए कई संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित की हैं।
2025 के नए Defense Framework में भी defense industrial capacity, advanced technology cooperation और supply-chain resilience को प्राथमिकता दी गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों देशों का रक्षा संबंध सैन्य अभ्यासों के साथ-साथ technology और industrial cooperation की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि समुद्री सुरक्षा भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के भविष्य के प्रमुख क्षेत्रों में बनी हुई है। आने वाले समय में किसी नए naval agreement, संयुक्त maritime exercise या नई technology initiative की आधिकारिक घोषणा होने पर इस दिशा की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
फैक्ट-चेक नोट: 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध स्रोतों की जांच में भारत-अमेरिका के बीच हाल में घोषित किसी नए बड़े समुद्री रक्षा समझौते की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली। इसलिए लेख में समुद्री सहयोग को मौजूदा Defense Framework और पहले से चल रही पहलों के संदर्भ में रखा गया है, न कि नई घोषित डील के रूप में।