पेट फूलना यानी ब्लोटिंग कई कारणों से हो सकता है। खाने के साथ ज्यादा हवा निगलना, कुछ खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, कब्ज और कुछ पाचन संबंधी समस्याएं इसके पीछे हो सकती हैं। वहीं तनाव भी पेट और दिमाग के बीच होने वाले संबंधों के कारण पाचन संबंधी लक्षणों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में नियमित शारीरिक गतिविधि और योग कुछ लोगों के लिए तनाव और पाचन संबंधी तकलीफों को संभालने में मददगार हो सकते हैं।
हालांकि, यह दावा कि रोजाना कुछ खास योगासन करने से सिर्फ एक हफ्ते में पेट फूलना पूरी तरह ठीक हो जाएगा, वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। योग पर उपलब्ध शोध में आम तौर पर कई हफ्तों या महीनों के अभ्यास को देखा गया है और अलग-अलग अध्ययनों के नतीजे भी एक जैसे नहीं हैं। 2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं पर योग के संभावित लाभ मिले, लेकिन शोध की पद्धतियों में काफी अंतर होने के कारण और अध्ययन की जरूरत बताई गई।
पेट फूलने के लिए कौन से 5 योगासन किए जा सकते हैं?
1. पवनमुक्तासन
पवनमुक्तासन योग में पेट और शरीर के निचले हिस्से को शामिल करने वाला आसन है। इसे आमतौर पर पाचन से जुड़े योग अभ्यासों में शामिल किया जाता है।
इसे करते समय पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और धीरे-धीरे उन्हें शरीर की ओर लाएं। हाथों से पैरों को सहारा देते हुए कुछ समय आराम से इसी स्थिति में रहें और फिर सामान्य स्थिति में लौटें।
आसन के दौरान पेट पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालें। दर्द या असहजता महसूस होने पर इसे रोक देना चाहिए।
2. वज्रासन
वज्रासन अपेक्षाकृत सरल आसन है और इसे भोजन के बाद भी बैठने वाले योग अभ्यास के रूप में आम तौर पर किया जाता है। इसमें एड़ियों पर बैठकर रीढ़ को सीधा रखा जाता है।
कुछ मिनट शांत होकर बैठने से सांस पर ध्यान केंद्रित करने और शरीर को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसे पेट फूलने का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
घुटनों या टखनों में दर्द या चोट होने पर इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
3. मार्जरी आसन
मार्जरी आसन में हाथों और घुटनों के सहारे शरीर को रखा जाता है और सांस के साथ रीढ़ को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे किया जाता है। इसे अक्सर कैट-काउ मूवमेंट के रूप में भी जाना जाता है।
इसका उद्देश्य शरीर की गतिशीलता और सांस के साथ तालमेल पर काम करना है। धीमी और नियंत्रित गति से किया गया ऐसा अभ्यास तनाव कम करने वाली योग दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
4. बालासन
बालासन एक आराम देने वाला योगासन है। इसमें शरीर को आगे की ओर झुकाकर माथे को जमीन या सहारे की ओर ले जाया जाता है और सांस को सामान्य रखा जाता है।
इसे योग सत्र के बीच शरीर को आराम देने के लिए किया जा सकता है। योग और तनाव पर उपलब्ध शोध से संकेत मिलता है कि नियमित योग अभ्यास कुछ लोगों में perceived stress यानी महसूस होने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
5. सेतु बंधासन
सेतु बंधासन में पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ते हुए पैरों को जमीन पर रखा जाता है और कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है।
यह पूरे शरीर को शामिल करने वाला आसन है। इसे शुरुआती लोग प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में सीख सकते हैं, खासकर यदि उन्हें पहले से पीठ, गर्दन या किसी अन्य हिस्से में समस्या हो।
क्या योग से पेट फूलना और तनाव दोनों में मदद मिल सकती है?
योग और पाचन स्वास्थ्य के बीच संबंध पर शोध जारी है। खासकर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसे विकारों में योग को लेकर कई अध्ययन हुए हैं। 2026 की एक व्यवस्थित समीक्षा में अलग-अलग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियों पर किए गए 12 अध्ययनों का मूल्यांकन किया गया। समीक्षा में बताया गया कि IBS से जुड़े कई अध्ययनों में योग के साथ लक्षणों, मूड और जीवन की गुणवत्ता में सुधार देखा गया, लेकिन अध्ययन छोटे और अलग-अलग तरीकों से किए गए थे।
दूसरी ओर, 2025 में प्रकाशित एक मेटा-विश्लेषण में IBS से जुड़े 11 यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों और 535 प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया। इसमें योग और नियंत्रण समूह के बीच गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षणों की गंभीरता, चिंता और अवसाद में स्पष्ट सांख्यिकीय अंतर नहीं मिला। शोधकर्ताओं ने उपलब्ध प्रमाण को अनिश्चित बताया और बड़े तथा बेहतर गुणवत्ता वाले अध्ययनों की जरूरत बताई।
इसलिए योग को पेट फूलने या तनाव का निश्चित इलाज बताना सही नहीं होगा। इसे नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव प्रबंधन की दिनचर्या के एक हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है।
एक हफ्ते में असर दिखने का दावा कितना सही?
पेट फूलने के कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक योगासन या सात दिन की दिनचर्या से सभी लोगों में समान परिणाम मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उपलब्ध अध्ययनों में योग के अलग-अलग कार्यक्रमों की अवधि कई हफ्तों से लेकर महीनों तक रही है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति सात दिन तक योग करने के बाद बदलाव महसूस करता है तो यह उसका व्यक्तिगत अनुभव हो सकता है, लेकिन इसे सभी लोगों पर लागू होने वाला वैज्ञानिक परिणाम नहीं माना जा सकता।
योग करते समय इन बातों का रखें ध्यान
योग सामान्य रूप से स्वस्थ लोगों के लिए उचित तरीके से किए जाने पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन गलत तरीके या जरूरत से ज्यादा जोर लगाने पर चोट लग सकती है। शुरुआती लोगों को कठिन आसन और जोरदार सांस लेने वाली तकनीकों से बचने तथा प्रशिक्षित योग शिक्षक से सही तकनीक सीखने की सलाह दी जाती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार योग में बदलाव की जरूरत हो सकती है।
पेट फूलने के साथ अगर लगातार पेट दर्द, कब्ज या दस्त, अचानक लक्षणों में बदलाव या बिना कारण वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष: पवनमुक्तासन, वज्रासन, मार्जरी आसन, बालासन और सेतु बंधासन को हल्की योग दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। योग तनाव प्रबंधन में मदद कर सकता है और कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्थितियों में इसके संभावित लाभों के संकेत भी मिले हैं। लेकिन पेट फूलना लगातार बना रहता है तो उसके कारण का पता लगाना जरूरी है, और सात दिन में निश्चित सुधार का दावा वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है।
फैक्ट-चेक नोट: “एक हफ्ते में पेट फूलना ठीक” होने का कोई विश्वसनीय सार्वभौमिक प्रमाण नहीं मिला, इसलिए headline और लेख में इसे गारंटी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।