तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद भी CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की कानूनी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए नोटिस दिया था। दोनों को 22 अक्टूबर को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होना था, लेकिन उन्होंने पूछताछ में शामिल होने के लिए और समय मांगा। पुलिस की ओर से आगे नया नोटिस जारी किए जाने की संभावना बताई गई है।
इस बीच शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेशी निर्धारित है। अदालत ने दास और रांका को रिहाई के समय अगली सुनवाई में जमानतदारों के साथ उपस्थित रहने का निर्देश दिया था।
सात दिन बाद जेल से बाहर आए थे दास और रांका
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हुई थी। पुलिस का आरोप है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के तौर पर अधिसूचित नहीं किए जाने के बावजूद दोनों समेत CJP के सदस्य वहां पहुंचे थे।
अदालत ने शुरुआती तौर पर दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था। 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ाई गई। इसके बाद 21 अक्टूबर को SEM अदालत ने पुलिस की ओर से तीन दिन और हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज कर दी और दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया।
रिहाई के साथ लगीं शर्तें
रिहाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं से लिखित आश्वासन लिया। इसमें उन्होंने शांति भंग न करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर को दोबारा कानूनी रूप से प्रदर्शन स्थल के तौर पर अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि कोई प्रदर्शन किया जाता है तो वह संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। दोनों नेताओं और उनके जमानतदारों को 23 अक्टूबर की सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। पुलिस को जमानतदारों की सत्यापन रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी है।
दोनों मामलों की जांच अब क्राइम ब्रांच के पास
मामला केवल SEM कोर्ट की कार्यवाही तक सीमित नहीं है। दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े 13 अक्टूबर के घटनाक्रम की दो FIR की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
इनमें जंतर-मंतर से जुड़े कथित अनधिकृत प्रवेश का मामला और कनॉट प्लेस से संबंधित मामला शामिल है। पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को CJP के सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे और इस दौरान कथित तौर पर निजी परिसर के रास्ते से प्रवेश किया गया था। इन घटनाओं के बाद अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं।
क्राइम ब्रांच को मामला सौंपे जाने का मतलब यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं। दोनों मामलों में जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
जेल से निकलने के अगले दिन मिला नोटिस
21 अक्टूबर को रिहाई के बाद अगले ही दिन क्राइम ब्रांच ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया। दोनों को 22 अक्टूबर को राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने को कहा गया था।
हालांकि, दोनों गुरुवार को पूछताछ में शामिल नहीं हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पुलिस से अतिरिक्त समय मांगा है। पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई और नए नोटिस का फैसला जांच की प्रक्रिया के अनुसार किया जा सकता है।
क्या CJP बड़ा प्रदर्शन नहीं कर पाएगी?
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि CJP किसी भी बड़े प्रदर्शन का आयोजन नहीं कर सकती। अदालत की ओर से लगाई गई शर्त विशेष रूप से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान से जुड़ी है। दास और रांका ने अदालत के समक्ष यह आश्वासन दिया है कि जंतर-मंतर को दोबारा अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
साथ ही, उन्होंने भविष्य के किसी भी प्रदर्शन को संवैधानिक दायरे में रखने की बात कही है। इसलिए मौजूदा स्थिति को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कानूनी प्रतिबंध और अदालत के आदेश की शर्तों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि CJP पर किसी व्यापक प्रदर्शन प्रतिबंध के रूप में।
23 अक्टूबर की सुनवाई पर नजर
अब मामले में 23 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे SEM कोर्ट में सुनवाई होनी है। सौरव दास और आशुतोष रांका को अपने जमानतदारों के साथ अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान पुलिस जमानतदारों के सत्यापन से संबंधित रिपोर्ट पेश करेगी।
दूसरी ओर, क्राइम ब्रांच की जांच अलग से जारी है। दोनों नेताओं का 22 अक्टूबर को पूछताछ में शामिल नहीं होना और उनके द्वारा अतिरिक्त समय मांगा जाना भी आगे की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि जेल से रिहाई के बावजूद जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में कानूनी प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है।
सत्यापन नोट: 23 अक्टूबर 2026 की अदालत की सुनवाई का अंतिम परिणाम इस लेख की तैयारी के समय उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया था। इसलिए उसे तथ्य के रूप में शामिल नहीं किया गया है।