कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रवेश करने के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया गया। यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश की कोशिश के बाद हुई।
क्या है पूरा मामला
13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और CJP के कुछ अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद इन लोगों ने बैरिकेड और बंद गेट पार कर परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। घटनास्थल के वीडियो में कुछ CJP सदस्यों को गेट और बैरिकेड पार करते हुए देखा गया।
जंतर-मंतर को 12 अक्टूबर से आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था। इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन और धरने के लिए निर्धारित स्थानों के तौर पर बताया गया था।
CJP की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें 14 अक्टूबर की सुबह करीब 3 बजे एक निजी वाहन से संसद मार्ग थाने लाया गया।
इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रात 3 बजे उन्हें गिरफ्तार किए जाने की बजाय उस समय संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाए जाने की बात सामने आई है। इससे पहले 13 अक्टूबर की सुबह जंतर-मंतर के पास उन्हें हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट थी।
किन आरोपों में हुई कार्रवाई
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने मामले में जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश, पहले दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने से संबंधित आरोप लगाए हैं। CJP नेताओं को पहले भी हिरासत में लिया गया था और बाद में एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त वाले बॉन्ड पर रिहा किया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दोनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट, मंदिर मार्ग के सामने पेश किया गया। अदालत ने इसके बाद दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पहले भी हिरासत में लिए गए थे
सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले 10 अक्टूबर को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस समय वे CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ दिल्ली आने वाली उड़ान में सवार थे और विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई थी।
11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष हुई कार्रवाई के बाद उन्हें बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा किया गया था। बाद की कार्रवाई में इसी बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन को भी एक आधार बताया गया।
जंतर-मंतर को लेकर विवाद
CJP और अन्य समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन से जुड़ा विवाद मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर लगाए जा रहे आरोपों से भी जुड़ा है। CJP ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने का विरोध किया है।
CJP का कहना है कि उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन का अधिकार जताया। दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई उस स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने और वहां प्रवेश से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोपों के आधार पर हुई है। इन दावों और आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सौरव दास और आशुतोष रांका पांच दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत के अगले आदेश पर नजर रहेगी।