भारत ने एशियन गेम्स 2026 का अभियान 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहकर खत्म किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इनमें महिलाओं और पुरुषों ने 38-38 पदक जीते, लेकिन स्वर्ण पदकों के मामले में भारतीय महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं। महिलाओं ने 11 गोल्ड जीते, जबकि पुरुषों के हिस्से में 7 स्वर्ण आए। बाकी तीन स्वर्ण मिश्रित स्पर्धाओं में मिले।
19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में हुए एशियन गेम्स में भारत ने कई खेलों में पदक जीते। हालांकि कुल पदकों की संख्या 2022 के हांगझोउ एशियाड के 107 से कम रही, लेकिन महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने इस बार भारतीय अभियान की तस्वीर को खास तौर पर प्रभावित किया।
38-38 पदक, लेकिन गोल्ड में बड़ा अंतर
भारतीय महिलाओं और पुरुषों के पदकों की कुल संख्या बराबर रही। दोनों वर्गों के खाते में 38-38 पदक आए। लेकिन स्वर्ण पदकों का बंटवारा अलग रहा।
महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण पदक जीते। ये स्वर्ण तीरंदाजी में तीन, मुक्केबाजी में दो तथा एथलेटिक्स, निशानेबाजी, गोल्फ, क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में एक-एक रहे। पुरुष खिलाड़ियों ने सात स्वर्ण जीते। तीन अन्य स्वर्ण मिश्रित स्पर्धाओं से आए।
इस तरह भारत के कुल 21 स्वर्ण में आधे से ज्यादा यानी 11 महिलाओं के खाते में आए। यह इस एशियाड में भारतीय महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सबसे साफ तस्वीर है।
किन खेलों में महिलाओं ने जीते स्वर्ण?
महिला खिलाड़ियों के 11 स्वर्ण अलग-अलग खेलों से आए, जिससे प्रदर्शन सिर्फ किसी एक खेल तक सीमित नहीं रहा।
- तीरंदाजी: महिला रिकर्व टीम, महिला रिकर्व व्यक्तिगत और महिला कंपाउंड टीम में तीन स्वर्ण
- मुक्केबाजी: लवलीना बोरगोहेन और परवीन हुड्डा ने स्वर्ण जीते
- एथलेटिक्स: महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने स्वर्ण जीता
- निशानेबाजी: नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप में स्वर्ण जीता
- गोल्फ: प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स गोल्ड जीता
- क्रिकेट: भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को हराकर स्वर्ण जीता
- कबड्डी: भारतीय महिला टीम ने अपना खिताब बरकरार रखा
- हॉकी: भारतीय महिला टीम ने 44 साल बाद एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
कुमकुम मोहौड़ से लेकर नीरू ढांडा तक कई यादगार प्रदर्शन
तीरंदाजी में 17 वर्षीय कुमकुम मोहौड़ भारतीय अभियान की प्रमुख खिलाड़ियों में रहीं। उन्होंने महिला रिकर्व टीम के साथ स्वर्ण जीतने के बाद व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भी गोल्ड हासिल किया। वह एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
निशानेबाजी में नीरू ढांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण जीता। बाद में उन्होंने किनान चेनाई के साथ मिश्रित ट्रैप टीम में भी स्वर्ण पदक जीता। इस जोड़ी ने फाइनल में एशियाई रिकॉर्ड बनाया।
गोल्फ में प्रणवी उर्स ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाया। महिला गोल्फ टीम ने भी अदिति अशोक, प्रणवी उर्स और दीक्षा डागर के जरिए रजत पदक जीता।
महिला क्रिकेट और हॉकी में भी मिली बड़ी कामयाबी
महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को 147 रन से हराकर स्वर्ण पदक जीता। स्मृति मंधाना ने फाइनल में 79 रन की पारी खेली, जबकि भारत ने 20 ओवर में 216/3 का स्कोर बनाया। श्रीलंका की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 69 रन पर सिमट गई।
हॉकी में भारतीय महिला टीम ने चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ भारत ने 44 साल बाद एशियन गेम्स महिला हॉकी का स्वर्ण हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ भारतीय टीम ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई भी किया।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी स्वर्ण जीता और इस तरह पहली बार एक ही एशियन गेम्स में भारत की पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक हासिल किया।
कुल पदकों में 2022 से पीछे, लेकिन प्रदर्शन का दायरा बदला
भारत ने हांगझोउ 2022 में रिकॉर्ड 107 पदक जीते थे। इस बार कुल पदक संख्या 85 रही। 2026 में भारत के 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक रहे और टीम चौथे स्थान पर रही।
फिर भी इस बार भारतीय महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन की खास बात यह रही कि उनके पदक कई अलग-अलग खेलों में आए। तीरंदाजी, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, निशानेबाजी, गोल्फ, क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में महिला खिलाड़ियों ने भारत के लिए स्वर्ण जीते।
भारत के 21 स्वर्ण का बंटवारा
| वर्ग | स्वर्ण पदक |
|---|---|
| महिला खिलाड़ी | 11 |
| पुरुष खिलाड़ी | 7 |
| मिश्रित स्पर्धाएं | 3 |
| कुल | 21 |
यहां मिश्रित स्पर्धाओं में पुरुष और महिला दोनों खिलाड़ी शामिल होते हैं, इसलिए इन्हें केवल पुरुष या महिला खाते में जोड़ना सही नहीं होगा। कुल पदक संख्या के 38-38 के आंकड़े के बावजूद स्वर्ण में महिलाओं की बढ़त इसी वजह से स्पष्ट होती है।
भारत के 2026 एशियन गेम्स अभियान का समापन 4 अक्टूबर को हुआ। कुल 85 पदकों के साथ भारत चौथे स्थान पर रहा और महिला खिलाड़ियों ने कुल पदकों में पुरुषों की बराबरी करने के साथ स्वर्ण पदकों में उनसे आगे निकलकर इस अभियान की एक अलग तस्वीर पेश की।