उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची की जांच में 10,470 ऐसी प्रविष्टियां मिली हैं, जिनमें अनियमितता पाई गई। जांच के बाद दो Electoral Registration Officers (ERO) के खिलाफ कानूनी और विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जबकि वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के एक कंप्यूटर सहायक की सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया गया है। मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
13,779 Form-8 एंट्री, 10,470 मंजूर
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र के Voter Registration Centre में 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच मतदाता विवरण में संशोधन के लिए कुल 13,779 Form-8 की एंट्री की गई।
इनमें 16 जुलाई तक 4,717 और 17 जुलाई से 29 अगस्त के बीच 9,062 एंट्री दर्ज की गईं। जांच में पाया गया कि इन प्रविष्टियों से संबंधित आवेदन या रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं थे। कुल 13,779 Form-8 में से 10,470 को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदन खारिज किए गए। जांच में सभी 10,470 मंजूर प्रविष्टियों में अनियमितता पाई गई।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मामला तब सामने आया जब पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की अंतिम SIR मतदाता सूची में दर्ज कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर की जांच करने पर उनके नाम और अन्य विवरण अलग दिखाई देने की शिकायतें मिलीं।
समाजवादी पार्टी की ओर से 19 अक्टूबर को चुनाव अधिकारियों को दिए गए ज्ञापन में पीलीभीत समेत मतदाता सूची से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए थे। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से जिला निर्वाचन अधिकारी, पीलीभीत से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई।
इसके अलावा अधिवक्ता फैजान अली खान की ओर से भी शिकायत की गई थी कि SIR के बाद अंतिम सूची में मौजूद उनके और उनके भाई के रिकॉर्ड बाद की मतदाता सूची में अलग दिखाई दे रहे हैं। शिकायत में EPIC नंबर के साथ दूसरे नाम प्रदर्शित होने की बात कही गई थी। इन व्यक्तिगत दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अलग-अलग मामलों में नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक जांच में 10,470 मंजूर Form-8 प्रविष्टियों में अनियमितता की पुष्टि की गई है।
दो ERO पर कार्रवाई, कंप्यूटर सहायक की सेवा समाप्त
जांच के बाद पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में संबंधित अवधि के दौरान तैनात दो ERO के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पीलीभीत के जिला प्रशासन के अनुसार, दोनों अधिकारियों को उनके पदों से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध किया गया है और विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है।
Voter Registration Centre में काम करने वाले कंप्यूटर सहायक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है और उसकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया गया है। मामले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी जिला प्रशासन ने दी है।
Form-6 और Form-7 की भी होगी जांच
मामला केवल मतदाता विवरण में संशोधन तक सीमित नहीं रखा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी को संबंधित कंप्यूटर सहायक द्वारा SIR समाप्त होने के बाद 10 अप्रैल से 21 अक्टूबर 2026 तक दर्ज किए गए सभी Form-6 और Form-7 की भी जांच करने का निर्देश दिया है।
Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए और Form-7 का इस्तेमाल नाम हटाने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही पीलीभीत की अन्य विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।
SIR के बाद कितने मतदाता कम हुए?
उत्तर प्रदेश में SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नामों की जांच की गई थी। 27 अक्टूबर 2025 की सूची में राज्य में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम SIR सूची में यह संख्या घटकर 13,39,84,792 रह गई।
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट और सत्यापन में नहीं मिल पाने वाले मतदाताओं की प्रविष्टियों की जांच की गई थी। अंतिम सूची में नाम हटाने के पीछे अलग-अलग कारण दर्ज किए गए थे।
यह व्यापक SIR प्रक्रिया और पीलीभीत में सामने आई बाद की अनियमितताएं अलग-अलग मुद्दे हैं। पीलीभीत मामले में अभी जांच और रिकॉर्ड की समीक्षा जारी है; इसलिए इसे पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में ऐसी ही गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
चुनाव आयोग के सामने अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
पीलीभीत में सामने आई अनियमितताओं के बाद मुख्य सवाल यह है कि अंतिम SIR सूची प्रकाशित होने के बाद मतदाता रिकॉर्ड में बिना संबंधित दस्तावेजों के बदलाव कैसे दर्ज हुए और उनकी मंजूरी किस प्रक्रिया के तहत हुई।
चुनाव अधिकारियों ने प्रभावित Form-8 प्रविष्टियों को नियमों के मुताबिक सुधारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही Form-6 और Form-7 की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित कंप्यूटर सहायक के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़ी कोई अन्य अनियमितता तो नहीं हुई।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से इस मामले में कार्रवाई शुरू हो चुकी है। आगे की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पीलीभीत में सामने आई गड़बड़ियां किस स्तर तक सीमित थीं और क्या अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की प्रविष्टियों की जांच की जरूरत है।
Verification note: 24 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पीलीभीत में 10,470 मंजूर Form-8 प्रविष्टियों में अनियमितता और संबंधित अधिकारियों/कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की पुष्टि होती है। विपक्ष द्वारा बताए गए व्यापक आंकड़ों और आरोपों को इस लेख में प्रशासन द्वारा सत्यापित निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।