चेन्नई: तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था को लेकर सियासी टकराव बढ़ गया है। डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य में हाल में सामने आए हत्या और हमले के मामलों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार पर निशाना साधा है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों में डर कम हुआ है और आम लोग सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से ‘शूटिंग मोड’ से बाहर निकलकर कानून-व्यवस्था पर कार्रवाई करने की मांग की।
स्टालिन ने 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में पिछले 24 घंटे में सामने आए कई आपराधिक मामलों का उल्लेख किया। उन्होंने तमिलनाडु को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर स्थिति में बताया और मुख्यमंत्री विजय, जो पुलिस विभाग की जिम्मेदारी भी संभालते हैं, से तत्काल कार्रवाई करने को कहा।
मायलापुर से मदुरै तक कई घटनाओं का जिक्र
स्टालिन ने अपनी पोस्ट में चेन्नई के मायलापुर, तिरुत्तनी, सलेम, डिंडीगुल और मदुरै समेत अलग-अलग इलाकों में हुई घटनाओं का जिक्र किया।
उनके मुताबिक, चेन्नई के मायलापुर में 19 वर्षीय युवक सत्यशीलन की हत्या हुई। तिरुत्तनी में एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया, जिसके बारे में स्टालिन ने दावा किया कि उसने अपनी 17 वर्षीय बेटी को कथित तौर पर परेशान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी।
सलेम में घर में मौजूद एक बुजुर्ग महिला जनाबाई की हत्या का भी उन्होंने उल्लेख किया। इसके अलावा डिंडीगुल जिले में वीरभथिरन पर हमले और मदुरै के समायनल्लूर के पास एक युवक की हत्या का जिक्र किया गया। शोलावंदन में TASMAC आउटलेट के पास श्याम सुंदरराज पर कथित हमले और एन्नोर रेलवे स्टेशन पर छात्रों पर हमले के प्रयास का भी स्टालिन ने उल्लेख किया।
हालांकि, इन घटनाओं का उल्लेख स्टालिन ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर राजनीतिक हमला करते हुए किया है। प्रत्येक मामले की जांच और पुलिस कार्रवाई की स्थिति अलग-अलग है। इसलिए इन घटनाओं को सरकार की विफलता का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
‘रक्त के दलदल में फंसा तमिलनाडु’ कहा
स्टालिन ने अपनी पोस्ट में तमिलनाडु में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बढ़े हैं और आम लोग डर के माहौल में हैं। उन्होंने राज्य में दिन और रात दोनों समय अपराध की घटनाओं का हवाला देते हुए तमिलनाडु को ‘रक्त के दलदल में फंसा’ बताया।
उन्होंने पुलिस गश्त, अपराधियों की निगरानी और शिकायत मिलने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई ‘सिंगापेन’ विशेष टीम को लेकर भी स्टालिन ने सवाल किया और आरोप लगाया कि टीम सोशल मीडिया रील्स बनाने में जितनी सक्रियता दिखाती है, उतनी महिलाओं की सुरक्षा में दिखाई जानी चाहिए।
‘शूटिंग मोड’ वाली टिप्पणी क्यों?
स्टालिन ने अपने हमले में विजय के फिल्मी करियर को भी राजनीतिक तौर पर निशाना बनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से ‘Take-Action’ और ‘Shooting Mode’ से बाहर निकलकर वास्तविक प्रशासनिक कार्रवाई करने को कहा।
अपने पोस्ट के अंत में स्टालिन ने लिखा, “Take – Action’ ShootingMode-இல் இருந்து விடுபட்டு, Please Take Action CM Sir!” यह टिप्पणी मुख्यमंत्री विजय के अभिनेता से राजनेता बनने के संदर्भ में की गई राजनीतिक टिप्पणी है।
कानून-व्यवस्था को लेकर स्टालिन का यह हमला पहली बार नहीं है। इससे पहले भी डीएमके नेताओं ने तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही और सरकार के कार्यक्रमों को ‘सिनेमा शूटिंग’ जैसा बताए जाने को लेकर विजय सरकार की आलोचना की थी। जून 2026 में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने भी विधानसभा को ‘शूटिंग स्पॉट’ जैसा बनाए जाने का आरोप लगाया था।
सरकार के सामने कानून-व्यवस्था पर जवाब देने की चुनौती
स्टालिन के आरोपों के बाद तमिलनाडु सरकार के सामने कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की राजनीतिक चुनौती है। मौजूदा विवाद का केंद्र हाल की आपराधिक घटनाओं के साथ-साथ पुलिस गश्त, शिकायतों पर कार्रवाई और अपराधियों की निगरानी जैसे मुद्दे हैं।
फिलहाल स्टालिन की टिप्पणी विपक्ष के राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बयान के जवाब में मुख्यमंत्री विजय या सरकार की ओर से इस विशेष आरोप पर विस्तृत प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए स्टालिन के आरोपों और सरकारी तौर पर स्थापित तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
संपादकीय सत्यापन नोट: स्टालिन द्वारा गिनाई गई घटनाओं को इस लेख में उनके आरोप/दावे के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। उपलब्ध स्रोतों से प्रत्येक घटना की स्वतंत्र पुलिस या न्यायिक पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी है। इसलिए उन्हें राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का अंतिम प्रमाण नहीं बताया गया है।