संजू सैमसन की टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मौजूदा फॉर्म ने एक बार फिर उनकी जगह को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। 2026 टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुने गए सैमसन विश्व कप के बाद भारत के लिए खेली पिछली 11 पारियों में सिर्फ दो अर्धशतक लगा सके हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ में खेले गए पहले टी20 में भी वह 11 रन बनाकर आउट हुए।
अब दूसरी ओर ईशान किशन के साथ-साथ 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी भी भारतीय टीम में सलामी बल्लेबाज के विकल्प के तौर पर मौजूद हैं। हालांकि वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में सूर्यवंशी को अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली, लेकिन उनकी लगातार अच्छी बल्लेबाजी ने टीम के शीर्ष क्रम में प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है।
11 पारियों में सैमसन का रिकॉर्ड
टी20 विश्व कप के बाद भारत के लिए सैमसन की पिछली 11 पारियों के स्कोर 5, 0, 1, 27, 10, 57, 50, 9, 7, 2 और 11 रहे हैं। इस दौरान वह सिर्फ दो बार अर्धशतक तक पहुंच सके। छह पारियों में उनका स्कोर दहाई तक भी नहीं पहुंचा।
वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में 11 रन की पारी के बाद उनकी पिछली चार टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों के स्कोर 11, 2, 7 और 9 रहे हैं। इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ उन्होंने लगातार 57 और 50 रन बनाए थे।
टी20 विश्व कप में शानदार था प्रदर्शन
सैमसन की मौजूदा स्थिति इसलिए चर्चा में है क्योंकि कुछ महीने पहले ही वह भारत के टी20 विश्व कप अभियान के प्रमुख बल्लेबाजों में शामिल थे। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाए थे। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में 89 और न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में भी 89 रन की पारी खेली। उनके इस प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया था।
विश्व कप के बाद हालांकि उनके प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रही। इसी दौरान टीम में शीर्ष क्रम के लिए विकल्प भी बढ़े हैं।
ईशान किशन के बाद वैभव सूर्यवंशी की चुनौती
ईशान किशन ने 2026 में भारतीय टी20 टीम में वापसी के बाद अपनी दावेदारी मजबूत की। टी20 विश्व कप से पहले सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उन्होंने झारखंड के लिए 10 मैचों में 517 रन बनाए थे और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे। इसी प्रदर्शन के बाद उन्हें भारत की टी20 विश्व कप टीम में बैकअप ओपनर और विकेटकीपर के तौर पर शामिल किया गया था।
अब वैभव सूर्यवंशी के रूप में एक और युवा विकल्प सामने है। सूर्यवंशी ने 2026 में भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और जिम्बाब्वे दौरे पर 151 रन बनाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता दिखाई। वह एशियन गेम्स में भी भारत की टीम का हिस्सा रहे, जहां उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 38 रन बनाए।
हालांकि मौजूदा वेस्टइंडीज सीरीज में टीम प्रबंधन ने पहले मैच के लिए फिर से सैमसन और अभिषेक शर्मा की ओपनिंग जोड़ी पर भरोसा किया। सैमसन 11 रन बनाकर आउट हुए, जबकि भारत ने यह मुकाबला आठ विकेट से जीता।
क्या प्रतिस्पर्धा का दबाव सैमसन पर है?
पूर्व भारतीय बल्लेबाज हनुमा विहारी ने सैमसन के खराब दौर और टीम में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच संबंध की बात कही है। उनके अनुसार, जब ईशान किशन ने टीम में वापसी के बाद रन बनाए, तब भी सैमसन के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली थी।
लेकिन इसे सैमसन की खराब फॉर्म का निश्चित कारण कहना उचित नहीं होगा। आंकड़े उनके हालिया प्रदर्शन में गिरावट जरूर दिखाते हैं, लेकिन यह साबित नहीं करते कि चयन की प्रतिस्पर्धा ही उनकी बल्लेबाजी पर असर डाल रही है।
दूसरी तरफ, पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने वैभव सूर्यवंशी को तुरंत सैमसन की जगह खिलाने की संभावना को खारिज किया है। उनका कहना है कि हर मैच के बाद सैमसन की जगह पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा।
अब नजर दूसरे टी20 पर
भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला 9 अक्टूबर को रांची में होना है। भारत लखनऊ में पहला मैच जीतकर सीरीज में 1-0 से आगे है। ऐसे में सैमसन के लिए अगला मुकाबला अपनी बल्लेबाजी में वापसी का मौका होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि वैभव सूर्यवंशी की वजह से सैमसन की टीम में जगह खतरे में है। हालांकि शीर्ष क्रम में विकल्प बढ़ने और सैमसन की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उनकी बल्लेबाजी पर निगाह जरूर रहेगी। खासकर तब, जब सूर्यवंशी लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं।
संपादकीय सत्यापन नोट: उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों में सैमसन की हालिया खराब फॉर्म और टीम में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की पुष्टि होती है, लेकिन यह साबित नहीं होता कि प्रतिस्पर्धा ही उनकी बल्लेबाजी में गिरावट का कारण है। इसलिए लेख में इसे संभावित दबाव/चयन बहस के रूप में रखा गया है, निश्चित कारण के रूप में नहीं।