नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन जारी रहा। 8 अक्टूबर को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्षी सांसद राजघाट पहुंचे और वहां प्रदर्शन किया। अब विपक्ष ने आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी की है। 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने और अपनी शिकायतें रखने के लिए विपक्षी नेताओं ने समय मांगा है।
विपक्ष का मुख्य आरोप चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और इससे जुड़े फैसलों को लेकर है। विपक्ष इसे “वोट चोरी” से जोड़ रहा है और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत संचालित बताता रहा है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे।
पहले दिन चुनाव आयोग तक मार्च की कोशिश
विपक्ष का मौजूदा विरोध प्रदर्शन 6 अक्टूबर से तेज हुआ। INDIA गठबंधन के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों ने धरना दिया और पुलिस ने कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
7 अक्टूबर को विपक्ष ने फिर प्रदर्शन किया। इस बार जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की गई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए। घटनाक्रम को लेकर एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
तीसरे दिन राजघाट पहुंचा विपक्ष
8 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने नई रणनीति के तहत पहले दिल्ली के कनॉट प्लेस में बैठक और लंच किया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेता बसों से राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि दी और प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 200 विपक्षी सांसद इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
राजघाट पर प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग जारी रखने की बात कही। विपक्षी नेताओं का कहना है कि SIR के कारण मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष के रूप में कोई न्यायिक फैसला सामने नहीं आया है।
अब राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ने की तैयारी
तीसरे दिन के प्रदर्शन के बाद विपक्ष ने आंदोलन का अगला पड़ाव राष्ट्रपति भवन को बनाया है। INDIA गठबंधन के नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए समय मांग चुके हैं और 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने की योजना सामने आई है। हालांकि, राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिलने की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में उस समय तक नहीं हुई थी।
विपक्ष राष्ट्रपति के सामने SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी शिकायतें रखने की तैयारी में है। इसके साथ ही INDIA गठबंधन के सांसदों की 9 अक्टूबर को संविधान सदन में बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें आगे के आंदोलन की रणनीति पर चर्चा होनी है।
सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा आंदोलन
विपक्ष की रणनीति अब सड़क पर लगातार प्रदर्शन करने के साथ इसे राज्यों और जिलों तक ले जाने की भी है। 8 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक INDIA गठबंधन ने राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मार्च निकालने तथा दिल्ली के बाहर भी रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है। न्यायपालिका का रुख अपनाने और SIR से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई की मांग उठाने की रणनीति भी सामने आई है।
इसके अलावा 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की बड़ी रैली की योजना की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस और विपक्षी दल इसे लंबे राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
10 अक्टूबर को भी दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन
इसी बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अलग से चल रहे युवा आंदोलन का अगला बड़ा कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है। Cockroach Janta Party (CJP) और कई छात्र संगठनों ने इस प्रदर्शन का ऐलान किया है। AISA, SFI और AISF समेत छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इसमें शामिल होने की बात कही है।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है। Indian Express के अनुसार, प्रस्तावित कार्यक्रम के मद्देनजर पुलिस ने बड़े स्तर पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की तैयारी की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम के लिए अनुमति नहीं दी गई है और BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं।
ज्ञानेश कुमार के मामले में आगे क्या होगा?
फिलहाल विपक्ष की मांग का केंद्र ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है, लेकिन उनकी पद पर मौजूदगी को लेकर कोई बदलाव सामने नहीं आया है। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ज्ञानेश कुमार अभी भी मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में दर्ज हैं। आयोग ने सितंबर 2026 में SIR से जुड़े कई फैसले भी अपनी आधिकारिक प्रक्रिया के तहत जारी किए थे।
ऐसे में आगे का घटनाक्रम मुख्य रूप से तीन स्तरों पर देखा जाएगा—
- राष्ट्रपति से मुलाकात: विपक्ष अपनी शिकायतें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने रखने की कोशिश कर रहा है।
- सड़क पर आंदोलन: 10 अक्टूबर के प्रस्तावित युवा और छात्र प्रदर्शन के साथ आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।
- राजनीतिक अभियान: राज्यों में कार्यक्रमों और 1 नवंबर की प्रस्तावित रामलीला मैदान रैली के जरिए विपक्ष मुद्दे को लंबे अभियान में बदलने की तैयारी कर रहा है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने की प्रक्रिया संविधान, कानून और आयोग के निर्देशों के तहत की जा रही है। सितंबर में आयोग ने SIR के दौरान कुछ मामलों में BLO को संबंधित मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज लेने और उन्हें ECINet पर अपलोड करने की प्रक्रिया भी तय की थी।
इसलिए फिलहाल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कोई तत्काल संवैधानिक या प्रशासनिक फैसला सामने नहीं आया है। विपक्ष आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि चुनाव आयोग अपने निर्धारित कामकाज के तहत SIR और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया जारी रखे हुए है।