नई दिल्ली। दिल्ली में यमुना किनारे उगाई जा रही कुछ सब्जियों में भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित खाद्य-सुरक्षा सीमाओं से कई गुना अधिक पाई गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की एक हालिया स्टडी में पालक में निकेल का स्तर तय सीमा से 97 गुना तक और सरसों में क्रोमियम 22 गुना तक अधिक दर्ज किया गया। अध्ययन में प्याज, मूली, आलू, मेथी, धनिया और दूसरी सब्जियों में भी अलग-अलग भारी धातुओं की अधिक मात्रा सामने आई है।
यह अध्ययन यमुना के किनारे स्थित सीमित कृषि क्षेत्र में किया गया है। इसलिए इसके निष्कर्षों को दिल्ली में बिकने वाली सभी सब्जियों या पूरी यमुना पट्टी की खेती पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता। शोधकर्ताओं ने खास तौर पर प्रदूषित पानी से सिंचाई वाले इलाकों में मिट्टी, सिंचाई के पानी और फसलों की नियमित जांच की जरूरत बताई है।
पालक में निकेल 97 गुना तक अधिक
शोध में कई सब्जियों के नमूनों में निकेल, क्रोमियम, मोलिब्डेनम, जिंक, कैडमियम और सीसा समेत विभिन्न धातुओं की जांच की गई। शोधकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल की गई खाद्य-सुरक्षा सीमाओं से तुलना में पालक में निकेल का स्तर 97 गुना तक अधिक पाया गया। प्याज में निकेल 65 गुना तक अधिक दर्ज हुआ।
क्रोमियम के मामले में सफेद मूली में इसकी मात्रा 11 गुना, पालक में 12 गुना और सरसों में 22 गुना तक अधिक बताई गई है। इसके अलावा आलू और प्याज में सीसा भी निर्धारित सीमा से ऊपर पाया गया, जबकि पालक में सीसे का स्तर करीब सात गुना तक अधिक दर्ज होने की रिपोर्ट है।
लाल मूली में मोलिब्डेनम का स्तर भी ज्यादा
अध्ययन में लाल मूली में मोलिब्डेनम की मात्रा 340.06 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक दर्ज की गई। इसी सब्जी में क्रोमियम 36.58 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया।
मेथी में जिंक का स्तर 177.72 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक रहा। धनिया के नमूनों में निकेल 19.91 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और कैडमियम 1.59 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया गया। सरसों में सीसे की मात्रा 5.86 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक बताई गई है।
किन सब्जियों में क्या मिला
- पालक: निकेल 97 गुना तक और क्रोमियम 12 गुना तक अधिक
- प्याज: निकेल 65 गुना तक अधिक
- सरसों: क्रोमियम 22 गुना तक अधिक
- सफेद मूली: क्रोमियम 11 गुना तक अधिक
- लाल मूली: मोलिब्डेनम 340.06 मिलीग्राम/किग्रा तक
- मेथी: जिंक 177.72 मिलीग्राम/किग्रा तक
- धनिया: निकेल 19.91 और कैडमियम 1.59 मिलीग्राम/किग्रा तक
- सरसों: सीसा 5.86 मिलीग्राम/किग्रा तक
यमुना के पानी से खेती और भारी धातुओं का संबंध
शोधकर्ताओं के मुताबिक, प्रदूषित नदी या बिना पर्याप्त उपचार वाले अपशिष्ट जल का इस्तेमाल सिंचाई में होने पर उसमें मौजूद धातुएं मिट्टी तक पहुंच सकती हैं। इसके बाद पौधों की जड़ें इन्हें सोख सकती हैं और कुछ धातुएं सब्जियों के खाने योग्य हिस्सों तक पहुंच सकती हैं।
शोध का नेतृत्व दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर दिनबंधु साहू ने किया। टीम में धर्मेंद्र कुमार, संजुक्ता साहू और शिवांकर अग्रवाल भी शामिल थे। अध्ययन में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालिंदी कुंज के आसपास यमुना से जुड़े कृषि क्षेत्र को शामिल किया गया था।
शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि अलग-अलग पौधों में धातुओं को सोखने और अलग-अलग हिस्सों में जमा करने की क्षमता अलग होती है। इसलिए किसी एक सब्जी में मिले स्तर को दूसरी सब्जियों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
स्वास्थ्य जोखिम का भी आकलन
अध्ययन में सब्जियों के सेवन से जुड़े संभावित गैर-कैंसरकारी और कैंसरकारी स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन भी किया गया। शोधकर्ताओं के मॉडल के मुताबिक, कई सब्जियों के लिए संयुक्त गैर-कैंसरकारी जोखिम का स्तर चिंता पैदा करने वाला था। इसमें मोलिब्डेनम का योगदान कई सब्जियों में प्रमुख बताया गया।
कैंसर जोखिम के अनुमान में लाल मूली का कुल जोखिम सबसे अधिक बताया गया। इसके बाद धनिया, पालक और सफेद मूली के अनुमान सामने आए। शोधकर्ताओं ने निकेल और क्रोमियम को इस जोखिम में प्रमुख योगदान देने वाली धातुओं में शामिल किया।
हालांकि, इस हिस्से के निष्कर्षों को सीधे यह प्रमाण नहीं माना जा सकता कि इन सब्जियों को खाने से किसी व्यक्ति को कैंसर होगा। यह अध्ययन उपलब्ध धातु-सांद्रता और अनुमानित सेवन के आधार पर संभावित स्वास्थ्य जोखिम का आकलन करता है।
क्रोमियम को लेकर अध्ययन की एक सीमा भी सामने आई है। शोध में कुल क्रोमियम मापा गया, लेकिन क्रोमियम के अलग-अलग रासायनिक रूपों, खासकर क्रोमियम-III और अधिक विषैले क्रोमियम-VI, के बीच अंतर नहीं किया गया। इसलिए क्रोमियम से जुड़े कैंसर जोखिम के अनुमान में अनिश्चितता बनी रहती है।
शोधकर्ताओं ने क्या सुझाव दिया
शोधकर्ताओं ने प्रदूषण प्रभावित कृषि क्षेत्रों में मिट्टी और फसलों की नियमित निगरानी की जरूरत बताई है। साथ ही सिंचाई के पानी की जांच, अपशिष्ट जल के उपचार और ऐसे इलाकों में कम भारी धातु जमा करने वाली फसलों को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।
सबसे अहम बात यह है कि अध्ययन का दायरा यमुना के एक सीमित हिस्से तक रहा। यमुना करीब 1,379 किलोमीटर लंबी नदी है और कई राज्यों से होकर गुजरती है। इसलिए इस रिसर्च के आधार पर दिल्ली में बिकने वाली हर हरी सब्जी को दूषित मानना उचित नहीं होगा। उपभोक्ताओं के लिए वास्तविक जोखिम का आकलन करने के लिए अलग-अलग इलाकों, मौसम और सब्जियों के नियमित नमूना परीक्षण की जरूरत होगी।
फिलहाल अध्ययन का मुख्य संकेत यह है कि जहां प्रदूषित पानी से खेती हो रही है, वहां सिंचाई के पानी के साथ-साथ मिट्टी और तैयार फसल की भी जांच जरूरी है।