कश्मीर घूमने गए गुरदासपुर के एक परिवार को ऑनलाइन होटल बुकिंग के बाद ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा कि उन्हें गुलमर्ग में करीब -4 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच अपनी कार में रात बितानी पड़ी। परिवार ने MakeMyTrip के जरिए श्रीनगर और गुलमर्ग में होटल बुक किए थे, लेकिन दोनों जगह बुक की गई संपत्तियां तय स्थान पर नहीं मिलीं। मामले में गुरदासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने 17 सितंबर 2026 को MakeMyTrip को कुल ₹48,775 का भुगतान करने का आदेश दिया है।
श्रीनगर और गुलमर्ग में की थी होटल बुकिंग
उपभोक्ता आयोग के आदेश के मुताबिक, गुरदासपुर के वकील राजेश चौहान दिसंबर 2025 में अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ कश्मीर यात्रा पर गए थे। उन्होंने MakeMyTrip के माध्यम से 27 से 28 दिसंबर के लिए श्रीनगर के Hotel Heritage Rose Inn में फैमिली रूम बुक किया था। इसके लिए ₹5,788 का भुगतान किया गया था।
इसके बाद 28 से 29 दिसंबर के लिए गुलमर्ग में Hotel Apple Tree Resorts के दो कमरे बुक किए गए थे। इन कमरों के लिए ₹12,987 का भुगतान किया गया था। दोनों बुकिंग के लिए परिवार के पास कन्फर्मेशन उपलब्ध था।
श्रीनगर पहुंचने पर होटल की जगह मिला होमस्टे
शिकायत के अनुसार, 27 दिसंबर को परिवार श्रीनगर में बुकिंग में दी गई लोकेशन पर पहुंचा। वहां Hotel Heritage Rose Inn नाम का होटल नहीं मिला। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उस स्थान पर एक निजी होमस्टे था।
इसके बाद परिवार को अपने स्तर पर दूसरी जगह ठहरने का इंतजाम करना पड़ा। अगले दिन उन्हें गुलमर्ग जाना था, जहां दूसरी होटल बुकिंग की गई थी।
गुलमर्ग में भी नहीं मिला बुक किया हुआ होटल
28 दिसंबर को परिवार गुलमर्ग पहुंचा। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रैफिक और आर्मी काफिले की वजह से परिवार रात करीब 10:30 बजे वहां पहुंचा। लेकिन वहां भी Hotel Apple Tree Resorts नहीं मिला।
भारी बर्फबारी और बेहद कम तापमान के बीच परिवार के पास रात बिताने के लिए बुक किया हुआ कमरा नहीं था। आयोग के आदेश के अनुसार, परिवार को -4 डिग्री सेल्सियस तापमान में अपनी कार के अंदर रात गुजारनी पड़ी।
इस घटना के कारण परिवार अपनी पहले से बुक की गई गुलमर्ग गोंडोला राइड का इस्तेमाल भी नहीं कर सका और अगले दिन गुरदासपुर लौट गया।
MakeMyTrip ने क्या दलील दी?
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचने के बाद MakeMyTrip ने खुद को ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म और मध्यस्थ बताया। कंपनी ने कहा कि वह इन होटलों की मालिक या संचालक नहीं थी और होटल की जानकारी संबंधित होटल संचालकों की ओर से दी गई थी।
कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि होटल संचालकों ने बुकिंग को ‘No Show’ के रूप में दर्ज किया था। MakeMyTrip ने आयोग के सामने यह दलील भी दी कि उसने रिफंड हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन होटल संचालकों ने नॉन-रिफंडेबल बुकिंग नीति का हवाला देते हुए राशि लौटाने से इनकार किया।
आयोग ने ‘No Show’ वाली दलील को नहीं माना
जिला उपभोक्ता आयोग ने MakeMyTrip की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि जब ग्राहक को बुक किया गया होटल मिला ही नहीं, तो उसे ‘No Show’ कहना उचित नहीं है।
आयोग ने यह भी देखा कि ग्राहक ने बुकिंग अवधि के दौरान कंपनी से संपर्क किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के सामने ऐसा पर्याप्त प्रमाण नहीं रखा जा सका जिससे यह साबित हो कि परिवार के लिए वास्तविक और वैध आवास उपलब्ध कराया गया था और ग्राहक ने वहां ठहरने से खुद इनकार किया था।
आयोग ने ₹48,775 देने का आदेश दिया
आयोग ने MakeMyTrip को कुल ₹48,775 का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें:
- ₹18,775 — दोनों होटल बुकिंग की राशि वापस करने के लिए
- 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज — ₹18,775 पर 25 दिसंबर 2025 से वास्तविक भुगतान तक
- ₹25,000 — शारीरिक परेशानी, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान के लिए मुआवजा
- ₹5,000 — मुकदमे के खर्च के रूप में
शामिल हैं।
आयोग ने मामले में कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार माना। उसने यह भी कहा कि केवल ऑनलाइन मध्यस्थ होने का दावा करके प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता, खासकर तब जब ग्राहक से भुगतान लिया गया हो और कन्फर्म बुकिंग वाउचर जारी किए गए हों।
मामले के मुख्य तथ्य
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| शिकायतकर्ता | राजेश चौहान |
| यात्रा | श्रीनगर और गुलमर्ग |
| पहला होटल | Hotel Heritage Rose Inn, श्रीनगर |
| पहली बुकिंग | ₹5,788 |
| दूसरा होटल | Hotel Apple Tree Resorts, गुलमर्ग |
| दूसरी बुकिंग | ₹12,987 |
| परिवार की परेशानी | -4°C में कार में रात |
| आयोग का आदेश | 17 सितंबर 2026 |
| कुल भुगतान | ₹48,775 |
यह मामला ऑनलाइन होटल बुकिंग में दी गई प्रॉपर्टी की जानकारी और बुकिंग के बाद ग्राहक को मिलने वाली सहायता को लेकर उपभोक्ता विवाद का उदाहरण है। हालांकि, किसी अन्य होटल या बुकिंग प्लेटफॉर्म के बारे में इससे अलग निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित मामले के तथ्य और प्रमाण अलग से देखना जरूरी होगा।