राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले की तिजारा नगर परिषद में सभापति पद का चुनाव सोमवार को सामान्य मतदान से कहीं आगे बढ़कर कानूनी और राजनीतिक विवाद में बदल गया। कांग्रेस समर्थित 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने के आरोपों के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत ने चुनाव टालने से इनकार करते हुए निर्वाचित पार्षदों को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किए जाने की बात कही। इसके बाद मतदान की समय-सीमा बढ़ाई गई और देर रात तक प्रक्रिया पूरी हुई।
मतगणना के बाद कांग्रेस प्रत्याशी रामावतार सैनी को 18 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी सुभाष सैनी को 16 वोट मिले। एक मत अवैध रहा। 35 सदस्यीय परिषद में सभापति पद के लिए 18 वोट बहुमत का आंकड़ा था।
संपादकीय तथ्य-जांच: दिए गए इनपुट में इस घटना को अजमेर से जोड़ा गया है, लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार यह मामला तिजारा नगर परिषद, खैरथल-तिजारा जिले का है। इसलिए खबर में अजमेर के बजाय तिजारा का उल्लेख किया गया है। अजमेर में भी 21 सितंबर को नगर निगम मेयर का चुनाव हुआ था, लेकिन रात 10 बजे तक मतदान और 18 पार्षदों को हरियाणा में रोके जाने वाला घटनाक्रम तिजारा से संबंधित है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 वार्ड हैं। चुनाव में निर्दलीय पार्षदों का दबदबा रहा और सभापति पद के लिए रामावतार सैनी तथा सुभाष सैनी आमने-सामने थे। रामावतार सैनी को कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था।
सभापति पद के मतदान से पहले कांग्रेस समर्थित 18 पार्षद हिमाचल प्रदेश से राजस्थान लौट रहे थे। कांग्रेस नेताओं और संबंधित पार्षदों की ओर से आरोप लगाया गया कि हरियाणा के चंडीमंदिर टोल प्लाजा के पास पुलिस ने उनकी बस को रोक लिया और उन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में बाधा हुई।
कुछ पार्षदों की ओर से उन्हें जंगल या अलग-अलग स्थानों पर ले जाने और बंदूक की नोक पर रखने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सभी बिंदुओं पर नहीं हुई है। हरियाणा पुलिस की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं है।
भाजपा विधायक बाबा बालकनाथ पर भी आरोप लगाए गए। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों को आरोप के रूप में ही दर्ज किया गया है और उन्हें प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
पार्षदों के मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाने के विवाद के बीच सभापति पद के उम्मीदवार रामावतार सैनी की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढांड ने की।
हाईकोर्ट ने चुनाव को स्थगित करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि निर्वाचित पार्षदों को अपनी पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने भिवाड़ी के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट से घटनाक्रम पर रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को देने को भी कहा।
इसका मतलब यह था कि चुनाव प्रक्रिया को रोकने के बजाय संबंधित पार्षदों को मतदान का अवसर देने पर जोर दिया गया।
दोपहर तक सिर्फ 16 पार्षद कर पाए थे मतदान
मूल कार्यक्रम के अनुसार सभापति पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक होना था। लेकिन पार्षदों के समय पर मतदान केंद्र नहीं पहुंचने के कारण निर्धारित समय में मतदान पूरा नहीं हो सका।
रिपोर्टों के अनुसार दोपहर करीब 2 बजे तक 35 में से 16 पार्षद ही मतदान कर पाए थे। इसके बाद निर्वाचन अधिकारी ने राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार मतदान का समय बढ़ाया। पहले इसे रात 8 बजे तक किया गया और बाद में रात 10 बजे तक मतदान की अनुमति दी गई।
देर रात पहुंचने के बाद हुआ मतदान
हरियाणा में रोके जाने का आरोप झेल रहे पार्षद बाद में तिजारा पहुंचे। इसके बाद मतदान की प्रक्रिया पूरी कराई गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मतदान रात 10 बजे की समय-सीमा तक चला और इसके बाद मतगणना की गई।
मतगणना में रामावतार सैनी को 18 वोट मिले, जबकि सुभाष सैनी को 16 वोट मिले। एक मत अवैध घोषित किया गया। इस तरह 35 सदस्यीय परिषद में 18 वोट हासिल कर रामावतार सैनी सभापति निर्वाचित हुए।
’16 घंटे जंगल में’ वाले दावे की स्थिति
इस घटनाक्रम को लेकर कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में पार्षदों के लंबे समय तक जंगल या अलग-अलग स्थानों पर रखे जाने के दावे सामने आए हैं। एक अंग्रेजी रिपोर्ट ने इसे करीब 16 घंटे के घटनाक्रम के रूप में वर्णित किया है। हालांकि यह अवधि और जंगल में रखे जाने से जुड़े सभी विवरण आधिकारिक रूप से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हुए हैं।
इसी वजह से इन दावों को खबर में स्थापित तथ्य के बजाय आरोप और उपलब्ध रिपोर्टों में सामने आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले से संबंधित प्रशासनिक रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष रखने का निर्देश दिया है। इसलिए पार्षदों को रोके जाने और पूरे घटनाक्रम में पुलिस तथा प्रशासन की भूमिका से जुड़े सवालों पर आगे की स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक रिपोर्टों से स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल तिजारा नगर परिषद के सभापति पद का चुनाव पूरा हो चुका है और रामावतार सैनी 18 वोट हासिल कर निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। मतदान प्रक्रिया में हुई देरी और पार्षदों को रोके जाने के आरोपों से जुड़ा विवाद हालांकि अलग प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे भी चर्चा में रह सकता है।